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11 साल से यहां पड़ी है महिला की लाश, नहीं हो रहा अंतिम संस्कार, क्योंकि फंसा है यह बड़ा पेंच

इतने साल बीतने पर भी अदालत ये तय नहीं कर पाई है कि मृतक हिंदू थी या मुसलमान।

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Shweta Singh

Nov 20, 2018

a dead body in kolkata kept from 11 years to be buried coz religion issue

11 साल से यहां पड़ी है महिला की लाश, नहीं हो रहा अंतिम संस्कार, क्योंकि फंसा है यह बड़ा पेंच

कोलकाता। भारत धार्मिक विविधताओं वाला देश है। यहां धर्म की मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि सिर्फ जिंदा ही नहींं बल्कि मौत के बाद भी ये हमारी जिंदगियों पर असर डालता है। इस खबर में धर्म के कुछ ऐसे ही असर के बार में बताने जा रहे हैं, जिसके कारण 11 साल से एक महिला के शव को अंतिम विदाई नहीं दी जा सकी है। शव के साथ हो रहे इस बेकद्री की वजह उसके अपने बच्चे हैं। हालांकि इतने साल बीतने पर भी अदालत ये तय नहीं कर पाई है कि मृतक हिंदू थी या मुसलमान।

इलाज के दौरान हुई थी मौत, अब तक अस्पताल में पड़ा है कंकाल

आपको बता दें कि 11 साल पहले गोराई मल्लिक नाम के व्यक्ति ने अपनी 70 वर्षीय बीमार पत्नी को हावड़ा जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन इसके बाद जैसे ही परिवारवाले अस्पताल प्रशासन से उसका मृत्युप्रमाण पत्र बनवाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे, तभी इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ आ गया। दरअसल रीना राय नाम की एक महिला ने आकर अस्पताल प्रबंधन के सामने दावा किया कि वह मृत परी मल्लिक की बहू है। साथ ही उसने कहा कि मृतक का असली नाम परी राय है जिसके पति का नाम स्वर्गीय प्रसाद राय है। यही नहीं रीना ने शव को उसे सौंपने और उसके अंतिम संस्कार को हिंदू रीति-रिवाज से करने की बात की। बता दें कि ये सभी जानकारी अस्पताल से आरटीआइ के माध्यम से मांगी गई थी।

शव के असली हकदार का नहीं हो पाया है फैसला

रीना के इन दावों के बाद मल्लिक परिवार ने इसका विरोध किया, जिसके कारण दोनों पक्षों में विवाद हो गया। मामला इस कगार पर पहुंचा कि अस्पताल प्रबंधन को पुलिस बुलाना पड़ा। पहले तो पुलिस ने मामले को थाने में ही सुलझाने का प्रयास किया लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने कानूनी रूप से अधिकार पत्र प्रस्तुत करने पर ही शव को सौंपने की शर्त रख दी और तब तक के लिए शव को मुर्दाघर में रख दिया गया। तब से ये मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में है और अब 11 साल बीतने के बाद भी शव के असली हकदार का फैसला नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि शव का कंकाल अभी भी अस्पताल के मुर्दाघर में अपने अंतिम रूप में मिलने के इंतजार में है।

दोनों परिवारों की ये है मांग

मामले की गहराई से जांच करने पर जो तथ्य सामने आए उसके मुताबिक परी हिंदू थी, जिसकी पहली शादी प्रसाद राय से हुई थी। प्रसाद राय और उसकी एक संतान भी है। हालांकि पहले पति की मौत के बाद उसने दूसरी शादी गोराई मल्लिक नाम के एक मुस्लिम से की। जिनसे उन्हें दो संतानें हुई। परी की मौत के बाद अब उनके दोनों पतियों के परिवार उनके अंतिम संस्कार को लेकर आपस में भिड़ गई हैं। दोनों परिवारों की यही मांग है कि उनके ही धर्म के अनुसार परी का अंतिम संस्कार किया जाए।