
Due to thirst Forest Leopard's death
हरिद्वार। बीते तीन वर्षों में 21 लोगों की मौत के बाद हरिद्वार स्थित राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में वन अधिकारियों ने आदमखोर तेंदुए को गोली मार दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वन अधिकारियों ने या तो नशीला इंजेक्शन देकर या अन्य तरह से पांच तेंदुओं को वहां से हटा दिया है।
इस तेंदुए को टिहरी डैम के विस्थापित गांव खांड के जोहरा मझरे क्षेत्र में बुधवार तड़के देखा गया था। यह क्षेत्र रायवाला छावनी स्थित आयुध भंडार के पास है। इसके बाद पार्क के निदेशक ने इस तेंदुए के आदमखोर होने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद उसे गोली मारने के आदेश दे दिए।
तेंदुए से मिले थे मानव डीएनए
मीडिया से बातचीत में राजाजी पार्क के निदेशक सनातन सोनकर ने कहा, "2014 के बाद से यह 21वीं घटना है। दो तेंदुओं में से मानव के डीएनए पाए गए। इस तेंदुए को न तो कर्मचारी पिंजड़े में पकड़ पा रहे थे और न ही किसी अन्य तरीके से वो कब्जे में आ रहा था। इसके बाद हमारे पास आखिरी रास्ता इसे गोली मारने का ही बचा था।"
सोनकर के मुताबिक भविष्य में आदमखोर प्रवृत्ति की घटनाओं के बार-बार होने को रोकना जरूरी था। वैसे भी क्षेत्र में बीते तीन सालों में 21 लोग आदमखोर तेंदुए का शिकार बन चुके हैं।
यह मादा तेंदुआ था, जिसके अगले दाहिने पैर का पंजा कटा था। पंजा कटा होने के चलते यह आंशिक रूप से विकलांग हो गया था और संभवता इस वजह से ही शिकार नहीं कर पाता होगा। शिकार करने में होने वाली परेशानी के बाद ही इसने आदमखोर प्रवृत्ति अपना ली होगी ताकि आसानी से पेट भर सके।
तेंदुए को गोली मारे जाने से पहले बीते मार्च में यह एक घर में कूदता नजर आया था। घटना की फुटेज काफी वायरल हुई थी। उस वक्त वन अधिकारी इसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने एक निर्माणाधीन इमारत में इसे घुसते देखे जाने के बाद अधिकारियों को सूचना दी थी।
विलुप्त प्राय प्रजाति है तेंदुआ
इसके बाद अधिकारियों के आने तक करीब तीन घंटे यह तेंदुआ एक घर में छिपा रहा। इस तेंदुए को फिर नशीला इंजेक्शन दिया गया और तब यह काबू में आया। हालांकि तब तक तीन लोगों को यह घायल कर चुका था। जैसे ही इसे पहला इंजेक्शन मारा गया, यह जमीन पर गिर पड़ा और एक अधिकारी इसे नजदीक से देखने पहुंचा, तो तुरंत इसने हमला कर दिया।
गौरतलब है कि तेंदुए लुप्तप्राय जातियों की रेड लिस्ट में सूचीबद्ध हैं। विश्व भर में तेंदुओं की तादाद में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि अन्य बड़ी बिल्लियों की तुलना मे तेंदुए संरक्षण में ज्यादा बेहतर ढंग से रहते हैं और इसकी वजह उनकी हालात के मुताबिक ढल जाने की शानदार प्रकृति है।
Updated on:
13 Jul 2018 12:38 pm
Published on:
13 Jul 2018 11:37 am
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