मुंबई। दक्षिण मुंबई की एक चर्चित चौक पर 51 साल बाद काला घोड़ा नजर आएगा। दरअसल, काले घोड़े की यह प्रतिमा एक कलाकृति है, जिसे इसके ही नाम के काला घोड़ा चौक पर लगाया जाना है। हाल ही में बृहन्न मुंबई नगर निगम ने हाल ही में इसे चौक पर लगाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो मशहूर काला घोड़ा चौक पर यह प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र होगी। यह प्रस्ताव काला घोड़ा एसोसिएशन ने दिया था। प्रस्ताव को मुंबई हेरिटेज कनवर्सेसन कमेटी के पास भेज दिया गया है। एसोसिएशन 17 विरासतों को सहेजने पर भी काम कर रहा है। 24 फीट ऊंची होगी यह प्रतिमा इसके तहत 24 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई जानी है। प्रतिमा को काला घोड़ा चौक पर बने पार्किंग इलाके में जहांगीर आर्ट गैलरी के ठीक सामने भीड़भाड़ वाली जगह पर लगाया जाना है।
किंग एडवर्ड की प्रतिमा की वजह से पड़ा चौक का नाम इस चर्चित चौक का नाम काले घोड़े पर सवार तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स किंग एडवर्ड सातवें की काले पत्थरों से बनी प्रतिमा के नाम पर पड़ा। यहूदी कारोबारी ने लगवाई थी प्रतिमा एक यहूदी कारोबारी और पुरानी चीजों को सहेजने का शौक रखने वाले अल्बर्ट अब्दुल्ला डेविड सेसून ने यह प्रतिमा लगवाई थी।
1965 में हटा दी गई थी प्रतिमा
1965 मेंं एडवर्ड की यह प्रतिमा हटा दी गई थी, जिस वजह से घोड़े की प्रतिमा भी हटानी पड़ी। एडवर्ड की प्रतिमा बाइकूला जू में स्थानांतरित कर दी गई।
अलफाज मिलर हैं वास्तुकार
काले घोड़े की प्रतिमा की डिजाइन और इसे लगाने का काम आर्किटेक्ट अलफाज मिलर ने किया है।
काला घोड़ा चौक पर विरासतों का रहा इतिहास
काला घोड़ा चौक विरासतों को सहेजने के लिए जाना जाता रहा है। यहां कई ऐतिहासिक इमारतें, संग्रहालय और गैलरी हैं। गैलरियों में जहांगीर आर्ट गैलरी, द नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट और छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय शामिल हैं।