
नई दिल्ली। विवादों से घिरे धर्म गुरुओं की जिंदगी की कहानियां काफी दिलचस्प रही हैं। इनके जैसी आलिशान जिंदगी शायद ही कोई जीता होगा। फिर चाहे वो आसाराम हो या राम रहीम। आसाराम को लेकर एक बार फिर मामला जोर पकड़ रहा है। दरअसल, अपने ही आश्रम में नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोप में पिछले पांच साल से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम का फैसला 25 अप्रैल को सुनाया जाना है। जिसको लेकर जोधपुर पुलिस सतर्क हो गई है।
पंचकूला की तरह जोधपुर में भी हो सकती है हिंसा
वहीं दोनों के मामले को लेकर कई तरह की समानताओं के बारे में भी लोग बात कर रहे हैं। जिसमें खास है, सुनवाई वाले दिन दंगा होने का खतरा। ये तो सर्वविदित है कि कि आसाराम और राम रहीम के भक्तों की कमी नहीं है। पुलिस को आशंका है कि आसाराम केस में सुनवाई के दिन उनके भक्त उत्पाद मचा सकते हैं। मतलब पंचकूला की तरह जोधपुर में भी हिंसा हो सकती है। साथ ही जानकारी मिली है कि फैसले के दिन 10 हजार से ज्यादा की संख्या में आसाराम के समर्थक जोधपुर पहुंच सकते हैं।
बता दें कि पिछले साल राम रहीम को बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाये जाने के बाद उसके समर्थकों ने पंचकूला में खूब उत्पात मचाया था और कई लोगों की मौत भी हो गई थी।
दूसरी तरफ एक और मामले में आसाराम और राम रहीम की तुलना की जा रही है और वो है सजा और जेल को लेकर। जहां एक तरफ राम रहीम सजा से पहले जेल गया ही नहीं वहीं आसाराम सजा की घड़ी आने तक जेल से निकल ही नहीं सका।
एक ही सरकारें
इन दोनों मामलों को लेकर एक राजनीतिक एंगल भी सामने आता है। वो ये कि पंचकूला में हिंसा के समय हरियाणा में भाजपा की सरकार थी और आसाराम मामले में राजस्थान में भी बीजेपी की ही है। ऐसे में भी हिंसा के आसार थोड़ा बढ़ जाते हैं।
Updated on:
17 Apr 2018 11:04 am
Published on:
17 Apr 2018 10:49 am
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