पत्रिका न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। दिल्ली के बाबुओं में इन दिनों एक बात चर्चा के केंद्र में है। एएसआई के महानिदेशक राकेश तिवारी रिटायरमेंट से पहले से काशी (वाराणसी) से काशगर (चीन) तक के रोड ट्रिप पर जाकर क्या करेंगे, क्योंकि उन्हें चीन में खुदाई की अनुमति नहीं मिली है। फिलहाल 2600 किलोमीटर के इस रोड ट्रिप को संस्कृति मंत्रालय से हरी झंडी मिल चुकी है और विदेश मंत्रालय से अनुमति मिलने का इंतजार है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार रोड ट्रिप का मकसद इतिहास की उन परतों से धूल हटाना है जो चीनी यात्री फा-ह्यान और हुएन-सांग अपने पीछे छोड़ गए। इस ट्रिप को काशी टू काशी नाम दिया गया है। इसका 90 प्रतिशत हिस्सा चीन में पड़ेगा। यात्रा की तिथि को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। रोड ट्रिप की शुरुआत पीएम के संसदीय क्षेत्र काशी से चीन के पश्चिमी घाट स्थित शहर काशगर तक की है।
काशी टू काशी
इस यात्रा का मकसद इतिहास की उन परतों से धूल हटाना है, जो चीनी यात्री अपने पीछे छोड़ गए थे
मंगोलिया और उईगर भी शामिल
ट्रिप में चीन के कोल्ड डेजर्ट के नाम चर्चित मंगोलिया से लेकर शिनजियांग उईगुर स्वायत्त क्षेत्र भी शामिल है। इसके लिए राकेश तिवारी ने तीन महीने की छुट्टियां ली हैं। रोड ट्रिप का खर्च को स्कोर्पियो एसयूवी वहन करेगी। इस दल में सहायक पुरातत्वविज्ञ, फोटो ग्राफर्स, सर्वेयर्स, लॉजिस्टक स्टाफ के सदस्य भी होंगे। इस ट्रिप में म्यांमार और चीन दो देश पड़ते हंै।
मैं पहले बनारस से गुवाहाटी या कोलकाता जाऊंगा। वहां से मिजोरम होते हुए म्यांमार पहुंचूंगा। इसके बाद मध्य चीन के हिस्से की यात्रा शुरू करूंगा। आखिर में काशगर पहुंचूंगा।
राकेश तिवारी, महानिदेशक एएसआई