
नई दिल्ली। देश के सबसे पुराने और बड़े राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को फैसला सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के पांच जज आज अंतिम फैसला सुनाएंगे। इस मामले की सुनवाई पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने की है। इस बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं। शुक्रवार देर शाम सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस बात की जानकारी दी गई थी। शीर्ष अदालत के वेबसाइट पर बताया गया था कि शनिवार सुबह 10.30 बजे अयोध्या केस को लेकर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।
आइए हम आपको बताते हैं कि ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले 5 न्यायमूर्ति कौन हैं?
1. मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई :
सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान सीजेआई रंजन गोगोई इस बेंच में शामिल हैं। रंजन गोगोई पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुर्खियों में छाए चार जजों में से एक हैं। वो देश के 46वें सीजेआई हैं। 18 नवंबर, 1954 को जन्में जस्टिस रंजन गोगोई ने डिब्रूगढ़ के डॉन वास्को स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की। 1978 में गुवाहाटी हाईकोर्ट से वकालत शुरू करने वाले जस्टिस गोगोई साल 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने थे। इसके बाद उन्हें 12 फरवरी, 2011 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया और इसके बाद वह चुनाव सुधार से लेकर आरक्षण सुधार तक के कई अहम फैसलों में शामिल रहे।
2. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ :
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ को 13 मई, 2016 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। इससे पहले वो 2013 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। बॉम्बे हाईकोर्ट के जज भी रहे। साथ ही चंद्रचूड़ महाराष्ट्र ज्यूडिशियल अकेडमी के निदेशक भी रह चुके हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट की उस नौ सदस्यीय बेंच का हिस्सा भी रह चुके हैं जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया। उनके पिता वाईवी चंद्रचूड़ देश के सबसे लंबे समय तक रहने वाले सीजेआई थे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
3. न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबड़े :
24 अप्रैल, 1956 को नागपुर में जन्मे बोबड़े सुप्रीम कोर्ट के जज हैं। वो महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुंबई और महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर के चांसलर भी हैं। इससे पहले वो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उनका कार्यकाल 23 अप्रैल, 2021 में खत्म होने जा रहा है। बोबड़े का सुप्रीम कोर्ट में आठ साल का कार्यकाल है। बोबड़े भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी हैं।
4. न्यायमूर्ति अशोक भूषण :
न्यायमूर्ति भूषण का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 5 जुलाई, 1956 को हुआ। अशोक भूषण ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल की है। साल 1979 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी की डिग्री भी हासिल की। 9 अप्रैल, 1979 को वो उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकृत हुए। इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही भूषण ने अपनी प्रैक्टिस शुरू की। वहां वह साल 2001 तक प्रैक्टिस करते रहे। 24 अप्रैल, 2001 को वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज नियुक्त किए गए। 10 जुलाई, 2014 को केरल हाईकोर्ट में उनका ट्रांसफर हो गया। 1 अगस्त, 2014 को वह केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 13 मई, 2016 को अशोक भूषण को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया।
5. न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर :
न्यायमूर्ति नजीर का जन्म 5 जनवरी, 1958 को कर्नाटक के कनारा में एक मुस्लिम परिवार में हुआ। यह कर्नाटक का तटीय इलाका है। जस्टिस नजीर पांच भाई-बहन हैं। उन्होंने मुवेदीद्री के महावीर कॉलेज में अपनी बी कॉम की डिग्री पूरी की। जस्टिस नजीर ने एसडीएम लॉ कॉलेज कोडियालबेल, मंगलुरु से कानून की डिग्री हासिल की है। नजीर ने 18 फरवरी, 1983 में बेंगलुरु में कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया। न्यायमूर्ति नजीर को मई 2003 में कर्नाटक उच्च न्यायालय में ही अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।
Updated on:
09 Nov 2019 09:30 am
Published on:
09 Nov 2019 09:28 am
बड़ी खबरें
View Allविविध भारत
ट्रेंडिंग
