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निजीकरण और बेरोजगारी को लेकर BMS का सरकार के खिलाफ हल्लाबोल, 3 जनवरी को देशव्यापी प्रदर्शन

हालांकि, बीएमएस ने स्पष्ट किया कि वह नागरिकता कानून पर सरकार का समर्थन करेगी। संगठन के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ सरकार के इस फैसले के साथ है।

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बेरोजगारी के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ का सरकार के खिलाफ हल्लाबोल, 3 जनवरी को देशभर में प्रदर्शन

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ (Bharatiya mazdoor sangh ) तीन जनवरी को देशभर में प्रदर्शन करेगा। बढ़ती बेरोजगारी और सरकार की निजीकरण नीति के विरोध में आयोजित होने वाले इस प्रदर्शन में सड़कों पर लोग उतरेंगे। बीएमएस के महासचिव विरजेश उपाध्याय (general secretary Brijesh Upadhyay) ने देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान करते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि रेलवे का 35 फीसदी हिस्सा निजी हाथों में सौंपा जा चुका है और बचे हुए हिस्से को कॉरपोरेट के तहत लाने पर सरकार काम कर रही है। यह सरासर गलत है। दिल्ली के जंतर मंतर पर बीएमएस का विरोध प्रदर्शन शुरू होगा।

केंद्र सरकार पर विनिवेश और निजीकरण के मुद्दे पर गुमराह करने का आरोप

केंद्र सरकार पर विनिवेश और निजीकरण के मुद्दे पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए बीएमएस महासचिव उपाध्याय ने कहा, "सरकार परमानेंट रोजगार को कॉन्ट्रैक्ट में बदल रही है। पब्लिक सेक्टर को सरकार या तो बेच रही है, या फिर विनिवेश के जरिए दूसरों के हाथों में सौंप रही है। बीएमएस की मांग है कि श्रम कानून में किए गए बदलाव को वापस लिया जाए।

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नागरिकता कानून पर सरकार के साथ- बीएमएस

बीएमएस ने मोदी सरकार से मांग की है कि सरकारी योजना लागू करने में लगे कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जीएसटी के बदले नियम की वजह से लोकल बॉडी के कर्मचारियों को वेतन मिलने में परेशानी आ रही है। हालांकि, बीएमएस ने स्पष्ट किया कि वह नागरिकता कानून पर सरकार का समर्थन करेगी। संगठन के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ सरकार के इस फैसले के साथ है। देशभर में इसको लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून का विरोध सिर्फ वोट बैंक के लिए किया जा रहा है।

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