
बिहार में अब खैनी पर भी जल्द लगेगा प्रतिबंध, केंद्र सरकार को लिखा खत
नई दिल्ली। बिहार में शराब पर पाबंदी लगाने के बाद नीतीश सरकार नशाखोरी के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार अब खैनी पर भी बैन लगाने पर विचार कर रही है। इसे लेकर बिहार सरकार ने केंद्र को एक खत लिखा है। जिसमें खैनी को खाद्य उत्पाद के रूप में सूचित करने की अपील की है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अगर खैनी को खाद्य उत्पाद में शामिल कर लिया जाता है, तो बिहार सरकार के पास स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर प्रतिबंध लगाने की शक्ति मिल जाएगी।
राज्य ने केंद्र को लिख खत
बिहार के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) संजय कुमार ने कहा कि सरकार ने केंद्र को खैनी बैन करने के लिए खत लिखा है। जिससे राज्य की जनता इससे होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सके। कुमार ने बताया कि बिहार में हर पांचवा शख्स खैनी का सेवन करता है। उन्होंने कहा कि बिहार में तंबाकू की खपत में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पिछले सात साल में जहां तंबाकू की खपत 53 फीसदी वो अब महज 25 फीसदी रह गई है।
सबसे ज्यादा खैनी की खपत
संजय कुमार ने कहा कि हमने सिगरेट और बीड़ी में में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू को नियंत्रित करने के लिए नियम तो बनाए हैं, लेकिन सूखी खैनी (कच्चे तंबाकू) की खपत ज्यादा है। डॉक्टर्स भी मुंह के कैंसर की मुख्य वजह तंबाकू को ही मानते हैं।
बिहार के लोग खैनी के आदी
2011 में आई ग्लोबल एडल्ड टौबेको सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार का हर दूसरा व्यस्क खैनी का आदी है। ये आंकड़ा देश में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि राज्य में 63 फीसदी पुरूष और 35 फीसदी महिलाओं को खैनी और तंबाकू का लत लग गया है।
नशाखोरी पर प्रतिबंध की मांग
समाज पर तंबाकू, खैनी समेत सभी तरह के नशीले पदार्थों से बुरा असर पड़ता है। इसी वजह से देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समय-समय पर शराब के साथ खैनी और तंबाबू पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते रहे हैं। बिहार में शराब की वजह से हर साल मौत के हैरान करने वाले आंकड़े सबके सामने हैं। सरकार द्वारा शराबबंदी के फैसले के बाद इसमें तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।
Published on:
08 Jun 2018 06:15 pm
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