
Supreme court Verdict Rape
नई दिल्ली। रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया है। दरअसल, सर्वोच्च न्यायलय ने कहा है कि शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंध रेप नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले को रद्द कर दिया है, जिसमें लड़का और लड़की 8 साल से साथ रहे रहे थे। लड़के ने लड़की को शादी का वादा किया था। इन आठ सालों में दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में लड़के को रेप का आरोपी ठहराना मुश्किल है।
आठ साल से साथ रह रहा था कपल
केस की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने खुद इस बात को माना कि वो आठ साल से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वो दोनों पिछले आठ साल से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे, लेकिन अब लड़का उसे छोड़कर भाग रहा है। ऐसे में कोर्ट ने युवक पर लगे सभी आरोपों को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को बदला
दरअसल, कथित पति ने रेप (आईपीसी की धारा 376, 420, 323 और 506 के तहत) की कार्यवाही समाप्त करने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा था कि जब आदमी शादी करने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता है और यह पता लग जाए कि उसका शुरू से ही शादी करने का कोई इरादा नहीं था, तो इसे बलात्कार माना जाएगा।
जस्टिस एस.ए. बोब्डे और एल. नागेश्वर राव की बेंच ने सुनाया फैसला
शिवशंकर नाम के एक युवक ने कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस एस.ए. बोब्डे और एल. नागेश्वर राव की पीठ ने आदेश में कहा कि हमें इस बात से मतलब नहीं है कि अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता वास्तव में विवाहित हैं या नहीं। इसमें कोई शक नहीं है कि वो विवाहित जोड़े की तरह से साथ रहे हैं।
यहां कि शिकायकर्ता ने भी यही कहा है कि पति-पत्नी की तरह से साथ रहे थे। लेकिन आरोपी पर बलात्कार का आरोप बनाए रखना मुश्किल है। हालांकि, हो सकता है कि उसने शादी के लिए झूठा वादा कर दिया हो। लेकिन आठ साल तक चले इस रिश्ते में शारीरिक संबंधों को बलात्कार मानना मुश्किल है।
Published on:
17 Apr 2018 09:23 am
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