
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर मीडिया को रिपोर्टिंग से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से मदद मांगी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर हो रही सार्वजनिक बहस को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। इस संबंध में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने पूरे घटनाक्रम को लेकर चिंता जताई। उन्होंने इस मसले पर बहस को विराम देने के लिए अटॉर्नी जनरल से मदद मांगी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया पर रोक के लिए किसी तरह का आदेश जारी करने से इनकार कर दिया और कहा कि अटॉर्नी जनरल से चर्चा के बिना ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
71 सांसदों के साथ उपराष्ट्रपति से मिला विपक्ष
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति बृजमोहन हरिकिशन लोया की मौत की स्वतंत्र जांच कराने को लेकर बवाल जारी है। इस मामले में विपक्ष के कई दलों ने देश के मुख्य न्यायाधीश को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। गौरतलब है कि लोया सोहराबुद्दीन के कथित एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में उन्होंने कई बार बीजेपी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कई बार समन भेजा था। बाद में न्यायमूर्ति लोया संदिग्ध परिस्थितियों में नागपुर में मृत पाए गए थे। इस संबंध में विपक्ष के 71 सांसदों ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात भी की। इस मामले में विपक्षी सांसदों की सहमति लेने में राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अहम भूमिका निभाई।
'कम से कम 50 राज्यसभा सांसद जरूरी'
आपको बता दें कि न्यायाधीश पूछताछ अधिनियम, 1968 के तहत किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत के लिए कम से कम 100 लोकसभा सांसदों या 50 राज्यसभा सांसदों की सहमति जरूरी होती है। महाभियोग प्रस्ताव पर सहमति जताने वालों में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस शामिल हैं। फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल और तृणमूल कांग्रेस ने इससे दूरी बना रखी है।
Published on:
20 Apr 2018 02:51 pm
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