रिपोर्ट: पश्चिम और दक्षिण की अपेक्षा उत्तर तथा पूर्व में हालात बेहतर, पीक पर पहुंचने के बाद तेजी से नीचे आ रहा कोरोना

गत 9 मई को दूसरी लहर का पीक पहुंचने के बाद हरियाणा में 8.9 प्रतिशत की औसत दर से नए केस में कमी आई, जबकि राजस्थान में 8.5 प्रतिशत, दिल्ली में 8.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 7.8 प्रतिशत और उतराखंड में 7.6 प्रतिशत की रफ्तार से नए मामलों में कमी देखी गई है।

 

नई दिल्ली।

देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर का कहर अब कम हो रहा है। कुछ राज्यों में यह रफ्तार धीमी है तो कहीं तेज। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों पर गौर करें तो दक्षिण भारत के राज्यों में कोरोना के नए मामलों में कमी की रफ्तार धीमी है, जबकि उत्तर और पूर्व में यह तेज है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गत 9 मई को दूसरी लहर का पीक पहुंचने के बाद हरियाणा में 8.9 प्रतिशत की औसत दर से नए केस में कमी आई, जबकि राजस्थान में 8.5 प्रतिशत, दिल्ली में 8.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 7.8
प्रतिशत और उतराखंड में 7.6 प्रतिशत की रफ्तार से नए मामलों में कमी देखी गई है।

पीक पर पहुंचने के बाद गिरे मामले
दूसरी ओर, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में नए केस में गिरावट की दर तमिलनाडु में 2.7 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 4.2 प्रतिशत है। इस तरह आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर भारत में दक्षिण की अपेक्षा कोरोना के नए मामलों में दोगुनी तेजी से कमी आ रही है। प्रत्येक राज्य के लिए गिरावट की दर का आकलन तब से किया गया है, जब सात दिनों के एक्टिव केस का औसत पीक पर पहुंच गया। 8 मई को पीक पर पहुंचने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर रोज के औसत नए मामले 3.7 प्रतिशत कम हो गए।

यह भी पढ़ें:- अच्छी खबर: भारत को स्पूतनिक-वी की तकनीक देने और वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने को तैयार हो गया रूस

वायरस के अलग-अलग वेरिएंट की संभावना
विशेषज्ञों की मानें तो दक्षिण और उत्तर के राज्यों में कोरोना के नए केस की रिपोर्टिंग सिस्टम में अंतर है। इसमें यह इशारा किया गया है कि उत्तर के राज्यों में कोरोना की रिपोर्टिंग में कुछ खामियां हैं और ऐसे में यह फर्क दिखाई पड़ रहा है। इसमें दो और वजहें हो सकती हैं। यह संभव है कि विभिन्न क्षेत्रों में वायरस के अलग-अलग वेरिएंट हों। साथ ही, अलग-अलग आबादियों के बीच सीरो पॉजिटिविटी निर्धारित करने से पहले यह देखना जरूरी है कि कौन सा संक्रमण संबंधित व्यक्ति के संपर्क में आया है।

पूर्वी राज्यों में भी हालात बेहतर
देश में उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की बात करते हैं। आंकड़ों के आधार पर नए केस में गिरावट की दर दूसरी लहर में सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को शामिल कर सकते हैं। महाराष्ट्र 21 अप्रैल को 65 हजार 447 मामलों (एक हफ्ते का औसत) के साथ पीक पर पहुंच गया। वहीं, उत्तर प्रदेश 27 अप्रैल को लगभग उसी समय 35 हजार 10 मामलों के साथ पीक पर पहुंचा। फिर भी 3 जून को महाराष्ट्र में औसत 17 हजार से अधिक मामलें सामने आए, जबकि इसी दिन उत्तर प्रदेश में यह संख्या घटकर एक हजार 742 हो गई।

यह भी पढ़ें:- भारत की वैक्सीन को असरदार नहीं मानता अमरीका, कोवैक्सीन या स्पूतनिक की डोज लेने वाले लोगों को दूसरे टीके लगवाने होंगे

उत्तर प्रदेश में कोरोना के नए मामलों में गिरावट की दर -7.8 प्रतिशत थी, जो महाराष्ट्र की -3.3 प्रतिशत के आंकड़े से करीब दोगुनी थी। वहीं उत्तर की तरह पूर्वी भारत के राज्यों में भी गिरावट की दर पश्चिम और दक्षिण राज्यों की अपेक्षाकृत कम है। बंगाल में रोज सामने आने वाले नए केस में 3.4 प्रतिशत ओर ओडिशा में 4.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

COVID-19 virus
Ashutosh Pathak
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned