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Coronavirus: भारत में क्यों बढ़ रहे हैं COVID-19 के पॉजिटिव केस

पिछले माह आईसीएमआर ने पेश की थी मैथमेटिकल मॉडलिंग। रोकथाम और कमी लाने के दो विचार पेश किए गए थे। बिना लक्षणों वाले रोगियों की पहचान करने में चुनौती भी बताई थी।
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Coronavirus outbreak in India

Coronavirus outbreak in India

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार से पूरे देश में 21 दिनों के लिए टोटल लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। पिछले करीब एक माह से सरकार द्वारा उठाए जा रहे तमाम कदमों के बीच देश में रोजाना कोरोना पॉजिटिव केस बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठना लाजमी है कि क्यों देश में कोरोना अपने पैर पसारता जा रहा है।

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इसे लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सोमवार को इस वायरस के फैलने के विभिन्न परिदृश्यों को रेखांकित करते हुए अपने गणितीय मॉडलिंग को सार्वजनिक किया। भारत द्वारा लॉकडाउन जैसे कड़े कदम उठाने से पहले ICMR की यह इन-हाउस मॉडलिंग पिछले महीने की गई थी। इसमें चीन से वायरस आने पर विचार किया गया, क्योंकि उस वक्त यूरोप या पश्चिम एशिया इससे त्रस्त नहीं थे, हालांकि अब इन देशों में भी वायरस अपने पैर पसार चुका है।

पेपर के मुताबिक, इस मॉडलिंग में दो क्रियाओं पर विचार किया गया है। 1. रोकथाम ताकि वायरस को आने से रोकने के लिए प्वाइंट-ऑफ-एंट्री (हवाई अड्डों) पर स्क्रीनिंग। 2. कमी लाना ताकि स्क्रीनिंग के दौरान कोई भी मामला छूटने पर भारत के भीतर इसे फैलने से निपटना जाए। कमी लाने के लिए, इस मॉडलिंग में केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के चार मेट्रो सिटी पर विचार किया गया, "क्योंकि इन शहरों से देश में शुरुआती COVID-19 फैलने के प्रमुख केंद्र बनने की संभावना थी।"

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रोकथाम पर निष्कर्षः इसमें बताया गया कि स्क्रीनिंग से जिन लोगों में बुखार जैसे लक्षण दिखेते हैं, केवल उन्हें ही थर्मल स्कैनर से पहचाना जा सकता है। "हालांकि देश के भीतर इस वायरस को बड़ी संख्या में फैलने से रोकने के लिए कम से कम उन 75 फीसदी लोगों की भी पहचान करनी जरूरी है, जिनमें इसके लक्षण नहीं नजर आ रहे हैं।"

इसके अलावा, "इस बीमारी के लक्षण ना दिखाई देने वाले 90 फीसदी लोगों का अतिरिक्त पता लगाने से महामारी के फैलने में 20 दिनों तक औसत समय की देरी होगी।" पर व्यापक रूप से बिना लक्षण वाले मामलों की स्क्रीनिंग "व्यावहारिक रूप से अव्यवहारिक" है। अभी तक बिना लक्षणों वाले व्यक्तियों में उचित जांच के लिए COVID-19 का कोई सटीक और तेज परीक्षण नहीं है।







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