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Coronavirus: अभी नहीं संभले तो हालात बुरे होने से कोई नहीं रोक सकता

locationनई दिल्लीPublished: Mar 24, 2020 12:20:39 pm

  • लॉकडाउन आपको कैद करने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षित रखने के लिए है।
  • ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज की रिपोर्ट में भारत में 35 लाख मौत का अनुमान।
  • आने वाले एक महीने में हालात बिगड़ने से बचाने के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी।

coronavirus outbreak
coronavirus outbreak
नई दिल्ली। दुनियाभर में कहर बरपाने वाला कोरोना वायरस भारत में भी तेजी से पैर पसार रहा है। भारत में सोमवार रात तक कोरोना वायरस के 468 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 9 की मौत हो गई है जबकि 35 ठीक होकर घर जा चुके हैं। देश में 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के 548 जिलों में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है और कई जगह कर्फ्यू भी लगा है। बस-ट्रेन-विमान समेत परिवहन के सभी साधन, स्कूल-दफ्तर-फैक्ट्री-शोरूम-दुकानें आदि बंद कर दिए गए हैं। इन सबके बीच एक बात पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है कि लोग लॉकडाउन का पालन करें और संभल जाएं, वर्ना आने वाले कुछ दिनों में हालात इतने बुरे हो जाएंगे कि फिर कुछ नहीं किया जा सकेगा।
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भारत में लोगों द्वारा लॉकडाउन को गंभीरता से ना लिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोमवार को सख्त निर्देश जारी किए। पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, "लॉकडाउन को अभी भी कई लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कृपया करके अपने आप को बचाएं, अपने परिवार को बचाएं, निर्देशों का गंभीरता से पालन करें। राज्य सरकारों से मेरा अनुरोध है कि वो नियमों और कानूनों का पालन करवाएं।"
दरअस? कोरोना वायरस ?? से लड़ाई लड़ने और खुद व अपने परिवार को बचाने के लिए सामाजिक दूरियां बनाना और घर के भीतर रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। सरकार ने लॉकडाउन इसलिए ही किया है ताकि कोरोना वायरस को स्टेज तीन में जाने से रोका जा सके। यह वह स्टेज है जिसमें कोरोना वायरस का प्रसार समुदाय के बीच होगा और वो स्थिति बहुत विकट हो सकती है। देश में फिलहाल कम्यूनिटी ट्रांसमिशन (सामुदायिक प्रसार) देखने को नहीं मिला है, लेकिन लोगों ने खुद को घर में रोकना जारी नहीं रखा तो फिर वो दिन दूर भी नहीं दिखाई देता।
अब आपको बताते हैं कि हालात कितने गंभीर हैं और आने वाले दिनों में यह कितने भयावह हो सकते हैं। इसके लिए आप भी एक सामान्य सी गणित लगा सकते हैं।

तारीख 22 जनवरी 22 फरवरी 22 मार्च 22 अप्रैल
पॉजिटिव केस 580 78651 3,37,578 सोचिए
मौत 17 2460 14,437 सोचिए
इन आंकड़ों को देखें तो साफ पता चलता है कि दो माह के भीतर कोरोना वायरस से मौत के आंकड़े 500 फीसदी यानी पांच गुणा बढ़ गए हैं।
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इस हिसाब से हम साधारण हिसाब लगाए तो अगर बाकी चीजें स्थिर रहती हैं, तो सोचिए आने वाले 22 अप्रैल यानी एक माह बाद क्या हालात होंगे। आज जो मौत के आंकड़े दिख रहे हैं, वो अगर इस रफ्तार से आगे बढ़ते रहे तो एक माह बाद मरने वालों की तादाद 14,437 × 5 = 72,185 हो जाएगी।
खतरा केवल इतना ही नहीं, यह वो न्यूनतम आंकड़ा है जिसकी हमें उम्मीद करनी चाहिए क्योंकि वृद्धि की दर भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

मौत के यह आंकड़े उन लोगों की आंखें खोलने के लिए काफी हैं जो अभी भी हालात के प्रति गंभीर नहीं हैं और बेवजह या फिर मस्ती में घरों से बाहर घूम रहे हैं।
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ब्रिटेन के प्रतिष्ठित इंपीरियल कॉलेज ने द्वारा कोरोना वायरस पर पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा चिकित्सा ढांचे को देखते हुए अकेले ब्रिटेन में मरने वालों का आंकड़ा पांच लाख पार कर सकता है, जबकि अमेरिका में यह संख्या 22 लाख और हिंदुस्तान में यह 35 लाख तक पहुंच सकती है।
इटली, फ्रांस समेत दुनिया के कई देशों में हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि मरने वालों के सगे-संबंधी उन्हें कंधा देने के लिए नहीं मिल रहे हैं। कल तक जो हंसता-खेलता परिवार था, आज उसका एक भी सदस्य जिंदा नहीं है। सरकार ने सारे प्रयास कर लिए और अब खुद को मजबूर-लाचार मान लिया है और स्थिति को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
भारत में अभी हालात उतने ज्यादा नहीं बिगड़े हैं। भले ही केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा करने में देरी की, लेकिन अभी भी अगर लोग घरों में रहें और सामाजिक दूरियां बनाते हुए सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें तो आने वाले कल को सुधारा और संवारा जा सकता है।
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इसलिए अपने बारे में, अपने परिवार के बारे में, अपने समाज के बारे में और अपने देश के बारे में सोचें। घर में परिवार के साथ वक्त बिताएं। ध्यान-योग, घरेलू कार्य करें, बच्चों-बुजुर्गों के साथ समय व्यतीत करें, कुछ अच्छा पढ़ें, टेलीविजन देखें, बागबानी करें, लेकिन घर पर रहें। कितना भी जरूरी काम हो आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़ घर से बाहर ना जाएं।
हाथ धोते रहें और सुरक्षित रहें। आने वाले कल को बचाने की जिम्मेदारी आप की है और आप ही इसे संवार सकते हैं। इसलिए सजग-सतर्क-सुरक्षित नागरिक बनें और अपना फर्ज निभाएं।

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