
आरएनए सिक्वेंसिंग टेस्ट में ज्यादा सैंपल मिलाने पर भी सटीक नतीजे आते हैं।
नई दिल्ली। भारत ने कोरोना वायरस (Coronavirus ) संक्रमण के खिलाफ जारी जंग में टेस्टिंग क्षमता में कई गुना इजाफा कर लिया है। एक महीने में सीएसआईआर की हैदराबाद ( CSIR Hyderabad ) स्थित प्रयोगशाला सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी ( CCMB ) द्वारा विकसित न्यू जनरेशन सिक्वेंसिंग टेस्ट ( New Generation Sequencing Test ) भी बाजार में आने की उम्मीद है। इस विधि से टेस्टिंग प्रोसेस शुरू होते ही कोरोना टेस्टिंग प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है।
इस विधि से बहुत जल्द टेस्ट शुरू होने की संभावना है। न्यू जनरेशन सिक्वेंसिंग टेस्ट की एक बार में 50 हजार नमूनों की जांच करने की क्षमता है।
इस बारे में सीएसआईआर ( CSIR ) के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे ने बताया कि यह टेस्ट सर्विलांस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। किसी क्षेत्र विशेष में कोरोना संक्रमण की जांच करनी हो तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
न्यू जनरेशन सिक्वेंसिंग टेस्ट में लोगों के स्वैब नमूने लेकर उनके आरएनए की नेक्स्ट जनरेशन सिक्वेंसिंग की जाती है। इसके बाद हजारों टेस्ट एक साथ करना संभव है।
Pool Testing से ज्यादा किफायती
सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि यह पूल टेस्ट जैसा ही है, लेकिन उससे ज्यादा व्यापक है। पूल टेस्ट में 25 से ज्यादा नमूने मिलाने पर रिपोर्ट गलत आने का खतरा होता है। आरएनए सिक्वेंसिंग टेस्ट में ज्यादा सैंपल मिलाने पर भी सटीक नतीजे आते हैं। नतीजतन यह टेस्ट बेहद किफायती होता है।
डॉ. मिश्रा के मुताबिक बेंगलुरु की एक कंपनी के साथ समझौता होने जा रहा है जो इसे बाजार में उतारेगी। लेकिन इससे पहले इसका परीक्षण करने और उसके बाद आईसीएमआर ( ICMR ) की मंजूरी लेना जरूरी होगा। अगले एक महीने के भीतर ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो सकती है। अगले एक महीने के भीतर ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो सकती हैं।
हर नमूने की अलग-अलग पहचान करने में सक्षम
पूल आरटी-पीसीआर टेस्ट ( RT-PCR ) में यदि 10 नमूने मिलाकर जांच की जाती है और उनमें से कोई एक भी पॉजिटिव आता है तो यह पता नहीं चल पाता है कि कौन-सा सैंपल संक्रमित है। ऐसी स्थिति में सभी 10 सैंपल की अलग-अलग जांच करनी पड़ती है। इस टेस्ट में यदि हजारों में से कोई एक सैंपल भी पॉजिटिव आता है तो उसे पहचानना संभव है, क्योंकि सभी नमूनों की कोडिंग पहले ही कर ली जाती है।
पूल आरटी-पीसीआर टेस्ट में यदि दस नमूने मिलाकर जांच की जाती है और उनमें से कोई एक भी पॉजिटिव आता है तो यह पता नहीं चल पाता है कि कौन-सा सैंपल संक्रमित है। ऐसी स्थिति में तब सभी 10 दस सैंपल की अलग-अलग जांच करनी पड़ती है। इस टेस्ट में यदि हजारों में से कोई एक सैंपल भी पॉजिटिव आता है तो उसे पहचानना संभव है, क्योंकि सभी नमूनों की कोडिंग पहले ही कर ली जाती है।
Updated on:
27 May 2020 02:06 pm
Published on:
27 May 2020 09:55 am
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