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ICMR के अध्ययन में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सामने आई हकीकत

locationनई दिल्लीPublished: Jun 27, 2021 04:51:03 pm

Submitted by:

Anil Kumar

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर की तरह घातक नहीं होगी। यदि अधिक से अधिक लोगों को टीका लगाया गया तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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Covid 19 Third Wave Not To Be More Severe As Second Wave: ICMR

नई दिल्ली। कोरोना समक्रमण के दूसरी लहर की रफ्तार अब धीमी पड़ चुकी है और रविवार को लगातार 20वें दिन देश में एक लाख से कम नए मामले सामने आए हैं। वहीं, दूसरी तरफ तेजी के साथ कोरोना टीकाकरण अभियान को भी बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में यह राहत की खबर है।

लेकिन इस राहत की खबर के बीच तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर्स कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर लगातार चेतावनी जारी कर रहे हैं। इसी के मद्देनजर सरकार कम समय में अधिक से अधिक लोगों को टीका लगाने की कोशिश में जुटी है।

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इन प्रयासों के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर एक और राहत की खबर दी है। दरअसल, कोरोना के डेल्टा वेरिएंट ने दूसरी लहर में काफी तबाही मचाई थी और अब डेल्टा प्लस वेरिएंट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिसको लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

माना जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर के लिए डेल्टा प्लस वेरिएंट एक मुख्य कारक साबित हो सकती है। इसी संदर्भ में ICMR ने भारत में COVID-19 की तीसरी लहर की संभावना पर एक अध्ययन प्रकाशित किया है।

दूसरी लहर की तरह घातक नहीं होगी तीसरी लहर

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर की तरह घातक नहीं होगी। यदि अधिक से अधिक लोगों को टीका लगाया गया तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि देश में वैक्सीनेशन अभियान को अगर और अधिक तेज कर दिया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो सके, तो तीसरी लहर को नियंत्रित करने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। यह अध्ययन मैथमेटिकल मॉडलिंग विश्लेषण पर आधारित है।

'भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर की संभावना: एक गणितीय मॉडलिंग आधारित विश्लेषण' नाम से प्रकाशित इस अध्ययन को आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव, संदीप मंडल और समीरन पांडा द्वारा लिखा गया है। इस शोध के निष्कर्ष में विशेषज्ञों ने बताया है कि कई पैमाने पर रिसर्च करने के बाद ये कहा जा सकता है कि कोरोना के दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर के ज्यादा गंभीर होने की आशंका कम है।

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इस अध्ययन में कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं पर बात करते हुए कहा गया है कि संक्रमण आधारित प्रतिरक्षा क्षमता समय के साथ कम हो सकती है और पहले संक्रमण की चपेट में आ चुके लोग फिर से संक्रमित हो सकते हैं।

टीकाकरण से रोका जा सकता है संक्रमण के गंभीर परिणाम

शोधपत्र में विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के दूसरी लहर के खत्म होने के बाद करीब तीन महीने में देश की 40 फीसदी आबादी को वैक्सीन की दोनों खुराक मिलने की उम्मीद की जा रही है। यदि वास्तव में ऐसा होता है तो फिर तीसरी लहर के सिम्टोमेटिक मामलों में 55 फीसदी तक की कमी होने की उम्मीद है।

अब तक के आंकड़ों के अनुसार, देश के करीब 20 फीसदी आबादी को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है, जबकि 4 फीसदी लोगों को दोनों डोज दी जा चुकी है। कोरोना टीकाकरण के जरिए तीसरी लहर को नियंत्रित किया जा सकता है। तीसरी लहर को गंभीर बनने से रोकने में मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग आदि की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।

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