
Data Story: Farmers income increased by 2.5 thousand rupees in Modi government
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने किसानों की आय ( Farmers Income In Modi Government ) बढ़ाने को लेकर तीन नए कृषि कानून बनाए हैं, जिसका विरोध लगातार किया जा रहा है। बीते 19 दिन से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हैं। किसानों का कहना है कि ये कानून उनके हित में नहीं है और इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने भी कहा है कि बातचीत के जरिए कुछ बिन्दुओं पर संसोधन किया जा सकता है, लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हैं।
इन सबके बीच अब कुछ मूल सवाल हैं जिसे जानना हम सबके लिए जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण ये है कि किसानों की आय अभी कितनी है और किसान कितना खर्च कर पा रहा है? मनमोहन सरकार ( Farmers Income In Manmohan Government ) से लेकर अब मोदी सरकार तक के शासन में आय व खर्च में कितनी बढ़ोतरी हुई है। कौन से राज्य में किसानों की स्थिति सबसे अच्छी और कहां पर सबसे खराब है? क्या 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को मोदी सरकार हासिल कर पाएगी?
चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2016 को उत्तर प्रदेश के बरेली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पहली बार ये कहा था कि हम 2022 तक किसानों के आय को दोगुनी करेंगे। अब इस वादे को चार साल पूरे हो चुके हैं और 2022 का डेडलाइन पूरा होने में दो साल का वक्त बचा है।
मोदी रकार में मात्र ढाई हजार रुपये बढ़ी किसानों की आय
आपको बता दें कि मौजूदा वर्तमान समय में किसानों की मासिक आय 8931 रुपये है, जो कि किसी भी तरीके से सही नहीं माना जा सकता है। क्योंकि कृषि के अलावा दूसरे क्षेत्रों में कामगारों की सैलरी में कई गुना इजाफा हुआ है।
मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी सरकार की बात करें तो किसानों की मासिक आय में सिर्फ ढाई हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यानी कि बीते चार सालों में किसानों को की आमदनी ढाई हजार रुपये बढ़ी है। मनमोहन सरकार में किसानों की मासिक आय 6,426 रुपये थी, जबकि अभी मोदी सरकार में 8,931 रुपये है।
वहीं यदि खर्च की बात करें तो मनमोहन सरकार में किसानों के पास खर्च करने की क्षमता 6,223 रुपये थी, जबकि मोदी सरकार में 6,646 रुपये है। ऐसे में ये समझा जा सकता है कि मौजूदा समय में किसानों की आमदनी में पहले की तुलना में भले ही ढाई हजार रुपये की आमदनी बढ़ी है, लेकिन खर्च करने में वे सक्षम नहीं हो पाए हैं।
इनकम में अव्वल टॉप 10 राज्य
अब हम राज्यों के आंकड़ों से ये समझने की कोशिश करते हैं कि मनमोहन और मोदी सरकार के समय में कौन से राज्य में किसानों की स्थिति सबसे अच्छी रही है। कौन-कौन से राज्यों में किसानों की आय बेहतर हुई है और कितनी रही है।
| राज्यों के नाम | मोदी सरकार | मनमोहन सरकार |
| पंजाब | 23133 रुपये | 18059 रुपये |
हरियाणा | 18496 रुपये | 14,434 रुपये |
केरल | 16927 रुपये | 11,888 रुपये |
| गुजरात | 11899 रुपये | 7926 रुपये |
| हिमाचल प्रदेश | 11828 रुपये | 8777 रुपये |
| उत्तराखंड | 10855 रुपये | 4701 रुपये |
| गोवा | 10687 रुपये | 9445 रुपये |
| कर्नाटक | 10603 रुपये | 8832 रुपये |
| महाराष्ट्र | 10268 रुपये | 7386 रुपये |
| राजस्थान | 9013 रुपये | 7350 रुपये |
खर्च में अव्वल टॉप 10 राज्य
बता दें कि भले ही किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन फिर भी कई राज्यों में किसान खर्च करने का मामले में आगे हैं। इनमें मोदी सरकार के राज में केरल-पंजाब सबसे आगे हैं, जबकि बंगाल और झारखंड सबसे पीछे हैं। वहीं मनमोहन सरकार की बात करें तो यहां पर भी खर्च करने के मामले में पंजाब-केरल के किसान आगे हैं, हालांकि यहां ओडिशा सबसे पीछे है।
| राज्यों के नाम | मोदी सरकार | मनमोहन सरकार |
| पंजाब | 11707 रुपये | 13311 रुपये |
| केरल | 11156 रुपये | 11008 रुपये |
| गोवा | 9445 रुपये | 9445 रुपये |
| जम्मू-कश्मीर | 9343 रुपये | 9017 रुपये |
| नागालैंड | 8976 रुपये | 7285 रुपये |
| हरियाणा | 8646 रुपये | 10637 रुपये |
| मणिपुर | 8617 रुपये | 6490 रुपये |
| मिजोरम | 8561 रुपये | 7936 रुपये |
| हिमाचल प्रदेश | 8556 रुपये | 7134 रुपये |
| उत्तराखंड | 8303 रुपये | 5784 रुपये |
Updated on:
14 Dec 2020 05:19 pm
Published on:
14 Dec 2020 05:09 pm
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