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देहरादूनः इस पुलिस थाने में चलता है स्कूल, गरीब बच्चों की मुफ्त में पढ़ाई

देहरादून के प्रेम नगर पुलिस थाने की कहानी कुछ अलग है। यह पुलिस थाना गरीब बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने बुनने में मदद कर रहा है और इसके भीतर ही एक स्कूल चलता है।

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देहरादून। यूं तो पुलिस थानों में मानवाधिकार के बड़े-बड़े बोर्ड लगे होने के बावजूद इनकी चाहरदीवारी के भीतर जमकर इसकी धज्जियां उड़ाए जाने के किस्से गाहे-बगाहे सामने आते रहते हैं। लेकिन देहरादून के प्रेम नगर पुलिस थाने की कहानी कुछ अलग है। यह पुलिस थाना गरीब बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने बुनने में मदद कर रहा है और इसके भीतर ही एक स्कूल चलता है।

देहरादून की टोंस नदी के पास नंदा की चौकी नामक झुग्गी बस्ती है। रोजाना एक वैन सुबह यहां के बच्चों को लेकर प्रेम नगर पुलिस थाने पहुंचाती है। सुबह 9.30 बजे से थाने में स्कूल शुरू हो जाता है। यहां पढ़ने वाले बच्चों की उम्र 4 से 12 साल है। थाने के भीतर लगे गमलों के बीच दरी बिछाकर इन बच्चों को बिठाया जाता है। स्कूल छह घंटों के लिए होता है और दोपहर 3.30 बजे तक चलता है।

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स्कूल के भीतर पढ़ने वाले बच्चों के हिसाब से उन्हें पढ़ाए जाने वाले विषय भी अलग-अलग होते हैं। चूंकि इन बच्चों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली होती है, इसलिए इन्हें पढ़ाए जाने वाले विषय भी हिंदी, अंग्रेजी, गणित की प्रारंभिक पढ़ाई होते हैं। जो बच्चे पढ़-लिख लेते हैं उन्हें इतिहास-भूगोल भी पढ़ाया जाता है।

ऐसे हुई स्कूल की शुरुआत

आसरा ट्रस्ट नामक एक गैर सरकारी संगठन के सदस्य इस थाने के सामने चकराता रोड के किनारे बने फुटपाथ पर बच्चों को पढ़ाते थे। यह रोड शहर की व्यस्त सड़क है इसलिए पुलिस थाना प्रभारी मुकेश त्यागी को इन बच्चों की चिंता हुई क्योंकि इतने ट्रैफिक की वजह से बच्चों की जान और सेहत दोनों पर खतरा था। उन्होंने इसके बाद स्कूल को थाने में ही चलाने का फैसला लिया और इसे शुरू कर दिया। फिलहाल स्कूल में बच्चों की संख्या 51 पहुंच गई है लेकिन जब मार्च 2018 में यह खुला था, तब केवल 10 बच्चे ही थे।

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स्कूल को मिल रही तमाम सहूलियतें

पुलिस के संरक्षण ने स्कूल के आगे बढ़ने में मदद की। जब लोगों को पता चला कि बच्चे सुरक्षित रहेंगे तो कई और ने भी अपने बच्चों को यहां भेजना शुरू कर दिया। इसके साथ ही स्कूल की मदद के लिए लोग अपने हाथ बढ़ाने लगे। किसी ने हर माह बच्चों को लाने-छोड़ने के लिए स्कूल वैन को 5,000 रुपए देने का वादा किया। तो किसी ने बच्चों को स्कूल बैग बांटे। वहीं, तकरीबन पुलिस थाने के तकरीबन 50 कर्मचारी और कई बाहरी लोग रोजाना यह भी सुनिश्चित रखते हैं कि बच्चों को रोजाना एक केला, समोसा या खाना जरूर मिले और इसके लिए वेे रोजाना कुछ न कुछ करते हैं।