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सावधान ! यहां कंस की है सरकार, शुरू हुआ सुप्रसिद्ध धनुयात्रा महोत्सव

सरकार के मंत्री को उनके हुकुम की तामील करनी पड़ेगी। यहां पर महाराज कंस का राज है। उनका शासन 2 जनवरी तक चलेगा।

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भुवनेश्वर/बरगढ़: यहां न जिला प्रशासन की चलेगी और न ही सरकार की। उल्टे प्रशासनिक अफसर, सरकार के मंत्री को उनके हुकुम की तामील करनी पड़ेगी। यहां पर महाराज कंस का राज है। उनका शासन 2 जनवरी तक चलेगा। करीब 6 किलोमीटर से भी ज्यादा विश्व प्रसिद्ध ओपेन थिएटर बरगढ़ में यह पौराणिक नाटक अपने आप में अनूठा है। इसे ओडिशा का सुप्रसिद्ध धनुयात्रा महोत्सव भी कहा जाता है। यह शनिवार से यूं तो विधिवत शुरू हो गया है, पर कंस का प्रभाव आज से दिखेगा।

विशाल शोभायात्रा निकाली गई

इस अवसर पर समलेश्वरी मंदिर से कलाकारों की एक विशाल शोभायात्रा भी निकाली गई। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए मथुरा नगरी पहुंची। धनुयात्रा 2013 के उद्घाटन के साथ ही महाराज उग्रसेन के आदेश पर देवकी-वासुदेव का विवाह रचाया गया। तभी महाराज कंस को आकाशवाणी सुनाई दी। उन्होंने उग्रसेन का राज्य छीना और खुद राजा बन गए। इसके बाद महाराज कंस ने देवकी-वासुदेव को कारागृह में बंदी बना लिया। इसको देखने हजारों की तादाद में दर्शक उपस्थित थे। अबकी कंस का किरदार भुवन प्रधान निभा रहे हैं।

नगर भ्रमण पर निकलते हैं कंस

इस दौरान बरगढ़ को मथुरा के रूप में माना जाता है। कंस जब हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं, तो प्रजा मार्ग के दोनों किनारे अनुशासित ढंग से हाथ जोड़कर खड़ी रहती है। कंस की पैनी नजर से कोई नहीं बचता। उनके दरबार में जिलाधिकारी और मंत्री को भी हाजिरी लगाने आना पड़ता है। धनुयात्रा महोत्सव समिति के संयोजक पदेन जिलाधिकारी होते हैं। अबकी जिम्मा जिलाधिकारी खगेंद्र नाथ पाढ़ी को दिया गया है। उनका कहना है कि इस विशाल आयोजन का शांतिपूर्ण समापन होता है। बरगढ़ की जीरा नदी के पास एक झील है, जिसे कालिंद्री कहा जाने लगता है। परंपरा के मुताबिक कृष्ण बलराम को लेने कोई वीआईपी जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं।


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