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पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग बोले, जब-जब जरूरत होगी सर्जिकल स्ट्राइक किया जाएगा

पूर्व जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय सेना दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती है और आगे जरूरत हुई तो बार-बार सर्जिकल स्ट्राइक की जाएगी।

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पूर्व सेना प्रमुख दलवीर सिंह सुहाग बोले- जब-जब जरूरत होगी सर्जिकल स्ट्राइक किया जाएगा

पूर्व जनरल दलबीर सिंह सुहाग

नई दिल्ली। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने बीते दिनों कहा था अब समय आ गया है कि फिर से एक सर्जिकल स्ट्राइक किया जाए। बुधवार को सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना प्रमुख रहे पूर्व जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय सेना दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती है और आगे जरूरत हुई तो बार-बार सर्जिकल स्ट्राइक की जाएगी। उन्होंने कहा, "बिना किसी दुर्घटना के 2015 का म्यांमार ऑपरेशन बहुत सफल रहा था। उस समय यकीन हो गया था कि अगर पश्चिमी सीमा पर कोई बड़ी घटना होती है तो जनता और सरकार हमसे ऐसे ही ऑपरेशन की उम्मीद करेगी।"

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पीएम मोदी का यह साहसी फैसला था

बता दें कि जनरल सुहाग ने आगे कहा कि उस समय जब पाकिस्तान ने उरी पर हमला किया था तो मेरे जहन में आया कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नही जाने देंगे। हमारे पास 15 महीने की ट्रेनिंग थी। मैंने अपने कमांडर्स को बताया कि जैसे ही राजनीतिक मंजूरी मिलेगी, हम पाकिस्तान के अंदर जाके सर्जिकल स्ट्राइक्स करेंगे।" इस बाबत प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत की। "हमने उन्हें ब्रीफ करते हुए काफी विकल्प दिए थे। पर्याप्त चर्चा के बाद प्रधानमंत्री ने स्ट्राइक्स करने की अनुमति दे दी थी। यह उनका बहुत साहसी फैसला था।" उन्होंने कहा कि उरी आतंकी हमले का जबाव देने के लिए सेना के पास कई विकल्प थे, लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक को तरजीह दी गई। इस बारे में उन्होंने बताया, "म्यांमार ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने कहा था कि वह म्यांमार नही है।

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हमारी सेना के पास काफी काबिलियत है

आपको बता दें कि जनरल सुहाग ने कहा हमारी सेना के पास काफी काबिलियत है। इस ऑपरेशन से हमने दिखा दिया कि हम में इतनी काबिलियत है कि अंदर घुस कर, खुद बिना किसी नुकसान के उनको भारी नुकसान पहुंचा कर वापस आ सकते हैं।" इस ऑपरेशन से भारत ने संदेश दिया कि दुश्मन अपनी जमीन पर भी सुरक्षित नहीं है। भारतीय सेना जब चाहे जिस जगह चाहे, जैसे चाहे सर्जिकल स्ट्राइक्स कर सकती है। आगे उन्होंने कहा कि पहला लक्ष्य था, सर्जिकल स्ट्राइक कामयाब रहे और दूसरा लक्ष्य था, सेना का कोई भी नुकसान न हो। यहां तक कि किसी भी कीमत पर घायल को पीछे नहीं छोड़ने का हुक्म था। आपको बता दें कि पाकिस्तान की ओर से उरी में आतंकी हमला किए जाने के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारा जबाव दिया था। सेना ने नियंत्रण रेखा के उस पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया और कई आतंकियों को मार गिराया और उनके ठिकाने भी ध्वस्त कर दिए थे।


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