
नई दिल्ली : दो साल पहले मोदी सरकार ने काफी जोर-शोर से जनधन खाता खोलने की योजना शुरू की थी। इस जनधन खाता को सरकार ने अपनी बड़ी कामयाबी बताया था। लेकिन शुक्रवार को संसद में वित्त मंत्रालय की तरफ से जानकारी दी गई कि खुले खातों में से 20 दिसंबर 2017 तक लगभग 49 लाख 50 हजार खाते बंद कर दिए गए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा खाता उत्तर प्रदेश मेें बंद हुए हैं। बंद हुए खातों में 50 प्रतिशत खाते तो सिर्फ उत्तर प्रदेश के हैं। इसके बाद दूसरे से पांचवें स्थान तक क्रमश: मध्य प्रदेश , गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान के खाते हैं। आश्चर्य तो यह है कि इनमें से तमिलनाडु को छोड़ कर सभी राज्य भाजपा शासित हैं। इससे सरकार की सबसे अच्छी योजना पर असर पड़ता दिख रहा है। सरकार ने बताया कि जनधन योजना के तहत देशभर के विभिन्न बैंकों में करीब 31 करोड़ खाते खोले गए थे। जिनमें से 24.64 करोड़ खाते ऑपरेशनल हैं। इन खातों में पिछले 24 महीनों में लेन-देन किया गया है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा खाते हुए बंद
जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा खाते बंद हुए हैं। वहां 9 लाख 62 हजार खाते बंद किए जा चुके हैं। दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, जहां 4 लाख 44 हजार खाते बंद हुए हैं। इसके अलावा गुजरात में 4 लाख 19 हजार, तमिलनाडु में 3 लाख 55 हजार, राजस्थान में 3 लाख 11 हजार, महाराष्ट्र में 3 लाख, बिहार में 2 लाख 90 हजार, पंजाब में 2 लाख 28 हजार, पश्चिम बंगाल में 2 लाख 23 हजार और दिल्ली में करीब 1 लाख 65 हजार खाते बंद किए जा चुके हैं। बंद किए जाने का कारण इन खातों में दो सालों तक कोई लेन-देन नहीं होना बताया गया है।
इंश्योरेंस भी कवर होता है इन खातों पर
सरकार की प्लानिंग है कि सभी परिवारों में जीरो बैलेंस पर जनधन खाता खुलवाया जाए। इस योजना को सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन उपकरणों में से एक के रूप में सरकार देख रही थी। सरकार इन खातों का इस्तेमाल डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के तौर पर करती है और खाताधारकों को दुर्घटना और जीवन बीमा भी देती है।
Published on:
03 Feb 2018 05:43 pm
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