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GOOD NEWS :पहली बार स्वदेशी सीआर-टी सेल थेरेपी से कैंसर मुक्त हुआ रोगी

सीआर-टी थेरेपी डॉ. हंसमुख जैन ने कहा, अभी गुप्ता कैंसर की कोशिकाओं से मुक्त है और यह दर्जा हासिल करने वाले वह पहले व्यावसायिक रोगी हैं।

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GOOD NEWS :पहली बार स्वदेशी सीआर-टी सेल थेरेपी से कैंसर मुक्त हुआ रोगी

15 वर्ष से अधिक उम्र के बी-सेल कैंसर से पीडि़त रोगी इस थेरेपी को ले सकते हैं।

मुंबई. स्वदेश विकसित सीआर-टी सेल थेरेपी से देश में पहली बार रोगी के कैंसर से मुक्ति का दावा किया गया है। ठीक होने वाले सेना के रिटायर्ड डॉ. (कर्नल) वीके गुप्ता को यह थेरेपी टाटा मेमोरियल अस्पताल में दी गई। खास बात ये है कि विदेशों में तीन से चार करोड़ महंगी ये थेरेपी पर यहां 42 लाख ही खर्च आया है।
सीआर-टी थेरेपी डॉ. हंसमुख जैन ने कहा, अभी गुप्ता कैंसर की कोशिकाओं से मुक्त है और यह दर्जा हासिल करने वाले वह पहले व्यावसायिक रोगी हैं। उन्होंने कहा, आजीवन इलाज का दावा करना अभी जल्दबाजी होगा। उपचार की सफलता के स्तर को निर्धारित करने के लिए हमें दो साल निगरानी की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, अब तक हमारे यहां थेरेपी से गुजरने वाले सभी रोगियो को कैंसर से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है, लेकिन डायग्नोस्टिक टेस्ट में कैंसर को कोई लक्षण नजर नहीं आया है। उन्होंने साफ किया रोगी में इसकी संभावित पुनरावृत्ति की समय सीमा पहचाने के लिए वर्षों के डेटा की आवश्यकता होती है। डॉ. हंसमुख जैन ने कहा, इस उन्नत थेरेपी से कैंसर से संबंधित मृत्युदर को कम करने और कैंसर के उपचार में क्रांति आने की उम्मीद है। 15 वर्ष से अधिक उम्र के बी-सेल कैंसर से पीडि़त रोगी इस थेरेपी को ले सकते हैं।

आइआइटी बॉम्बे ने किया विकसित
स्वदेशी रूप से विकसित इस थेरेपी को आइआइटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में स्थापित इन्यूनोएसीटी ने विकसित किया है, जो ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे बी-सेल कैंसर का इलाज है। बी-सेल कैंसर प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में बनने वाले कैंसर का एक प्रकार है। इस थेरेपी के व्यावसायिक उपयोग के लिए अक्टूबर 2023 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अनुमोदित किया था। वर्तमान में यह देश के 30 से ज्यादा अस्पतालों में उपलब्ध है।

उम्मीद छोड़ चुके थे कर्नल गुप्ता
28 वर्ष सेना में डॉक्टर के रूप में सेवाएं देने वाले गुप्ता तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया से पीडि़त थे। यह तेजी से बढऩे वाला कैंसर है, जो सफेद रक्त कौशिकाओं, खासकर लिम्फोसाइट्स को प्रभावित करता है। 2022 में गुप्ता को अस्थि मज्जा प्रत्योरोपित किया गया, लेकिन विफल रहा। उन्होंने कहा, मुझे पता था कि मेरे पास कुछ ही महीने बचे हैं, लेकिन सीआर-टी सेल थेरेपी ने मुझे बचा लिया। अब मैं सैनिक की तरह महसूस कर रहा हूं। थका हुआ, लेकिन हार मानने को तैयार न हीं।