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रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, पटरियों पर 160 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी सेमी हाई स्‍पीड ट्रेनें

चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित ट्रेन-18 से मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।

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Dhirendra Kumar Mishra

Aug 24, 2018

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रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, पटरियों पर 160 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी सेमी हाई स्‍पीड ट्रेनें

नई दिल्‍ली। भारतीय रेल मेक इन इंडिया के तहत देश में निर्मित और सेमी हाईस्पीड ट्रेन-18 को अगले महीने से प्रायोगिक तौर पर चलाएगा। ट्रेन का ट्रायल सफल रहने के बाद उसे भारतीय रेलवे के बेड़े में शामिल करने की योजना है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्‍ट्री में निर्मित ट्रेन-18 से मोदी के मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। इससे रेल यात्रियों को दिल्‍ली से पटना, लखनऊ, कोलकाता, मुंबई, चेन्‍नई जैसे शहरों का सफर तय करने में राजधानी और शताब्‍दी की तुलना में आधे घंटे से भी कम का समय लगेगा। यानी लोग सेमी हाईस्‍पीड ट्रेन के चलते ही देश की वीआईपी ट्रेनों को भूल जाएंगे।

मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
सेमी हाई स्‍पीड ट्रेन को भारतीय रेल की तकनीकी सलाहकार अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ) ट्रेन को प्रायोगिक तौर पर चलाएगी और उसे मान्यता प्रदान करेगा। ट्रेन-18 को इसी साल जून में बेड़े में शामिल किया जाना था। यह ट्रेन 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। ट्रेन का परिचाल प्रारंभ होने के बाद देश के किसी भी कोने का सफल तय करना आसान हो जाएगा। इसके कोच से मौजूदा शताब्दी और इंटरसिटी के कोच से बदला जाएगा। इससे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित ट्रेन-18 से मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।


पूरी तरह से वातानुकूलित

चेन्‍नई की इंटीग्रल कोच फैक्‍ट्री में निर्मित ये ट्रेनें स्वचलित ट्रेन मेट्रो की तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की तरह चलेगी। इसके लिए इंजन की आवश्यकता नहीं होगी। यानी इसके ऑपरेशन में मैन पावर की जरूरत नहीं पड़ेगी। भविष्य में शताब्दी जैसी ट्रेनों को हटाकर ट्रेन-18 चलाने की योजना है। रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि आईसीएफ छह ऐसे ट्रेन सेट बनाएगा, जिनमें से दो में स्लीपर कोच होंगे। पूरी तरह वातानुकूलित इस चेयरकार ट्रेन में वाई-फाई की भी सुविधा होगी।