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नौकरी पेशा लोगों को सरकार ने दिया बड़ा तोहफा, अब इतना होगा न्यूनतम वेतन

दिल्ली सरकार ने प्रस्तावित न्यूनतम वेतन के बारे जानकारी दी है। सबसे कम वेतन 14,842 रुपए प्रति माह रखा गया है।

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नौकरी पेशा लोगों को केजरीवाल सरकार ने दिया तोहफा, अब इतना होगा न्यूनतम वेतन

नई दिल्ली। अब नौकरी करने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। दिल्ली सरकार ने नौकरी पेशा लोगों को एक शानदार तोहफा दिया है। हालांकि यह निर्णय उन कारोबारियों के लिए मुसीबत बन सकता है जो कर्मचारियों को तय न्यूनतम वेतन नहीं देते हैं। दिल्ली विधानसभा के न्यूनतम वेतन विधेयक संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति ने मंजूरी पहले ही दे दी थी। अब तयशुदा न्यूनतम वेतन से कम देने वाले कारोबारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस नए फैसले के बाद कानून में बदलाव हुआ है। जिसके बाद समाचार पत्रों के माध्यम से जनता को प्रस्तावित न्यूनतम वेतन के बारे में अवगत कराया गया है।

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जरूरी है कम से कम इतना वेतन देना

नए कानून के लागू होने के साथ ही दिल्ली में अलग-अलग योग्यता और दक्षता के हिसाब से न्यूनतम वेतन तय हो गया है। सबसे कम वेतन 14,842 रुपए प्रति माह रखा गया है। बता दें कि प्रस्तावित न्यूनतम मजदूरी की दरों की गणना केंद्रीय भंडार और खादी ग्रामोद्योग से 10.11.2018 को मिली दरें और अन्य मदों जैसे आवास, ईंधन और शिक्षा की गणना पर आधारित हैं। श्रम विभाग, दिल्ली सरकार ने न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 की धारा 5 (1) (बी) के प्रावधानों के अंतर्गत दिए गए प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय के आदेश दिनांक 31.10.2018 के अनुसार स्वीकार किया है।

ये होगा न्यूनतम वेतन
-प्रस्तावित न्यूनतम वेतन अकुशल श्रमिक के लिए - 14842 रुपए हर माह
- अर्द्धकुशल श्रमिक के लिए 16,341/ प्रतिमाह - (अकुशल मजूदरी का 10.1 प्रतिशत अतिरिक्त)
- कुशल श्रमिक के लिए - 17991/ प्रतिमाह - (अर्द्धकुशल मजूदरी का 10.1 प्रतिशत अतिरिक्त)
- गैर मैट्रिकुलेट के लिए - 16341/ प्रतिमाह - (अर्द्धकुशल श्रेणी के समान)
- मैट्रिकुलेट लेकिन स्नातक नहीं, श्रमिक के लिए - 17991/ प्रतिमाह - (कुशल श्रेणी के समान)
- स्नातक श्रमिक एवं उससे ऊपर श्रमिक के लिए - 19572/ प्रतिमाह - ( कुशल मजदूरी का 8.79% )

40 गुना हुआ जुर्माना, सजा भी छह गुनी
अपने कर्मचारियों को तय न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने वाले कारोबारियों को सबक सिखाने के लिए सजा का प्रावधान भी किया गया है। दोषी कारोबारियों को 20 हजार रुपए का जुर्माना और तीन साल तक की जेल होगी। इससे पहले केवल 500 रुपए का जुर्माना और छह महीने तक की सजा का प्रावधान था।