
नई दिल्ली। राजाओं और नवाबों का शासनकाल हमारे देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उनके शासनकाल में निर्मित इमारतें आज भारत के अमूल्य धरोहर हैं। आज ये सारी जगहें टूरिस्ट प्लेस के रूप में जानी जाती हैं। एक ऐसी ही धरोहर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित है। जिसे लोग हजार दुआरी के नाम से जानते हैं। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि इसमें हजार दरवाजें हैं। इसमें 100 दरवाजें सच में बने हैं और बाकी के 900 दरवाजें नकली हैं लेकिन खास बात तो ये है कि आप इन्हें देखकर बिल्कुल भी नहीं पहचान पाएंगे।
करीब 41 एकड़ में फैले इस किले का निर्माण 19 वीं शताब्दी में निज़ाम हुमायूं जहां के शासनकाल में किया गया था। उस समय निज़ाम साहब बंगाल, बिहार और ओडिशा के इन तीनों ही राज्यों के प्रमुख थे।
इस किले का निर्माण उस समय के प्रसिद्ध वास्तुकार मैकलिओड डंकन ने ग्रीक शैली के आधार पर बनाया था। यह किला भागीरथी नदी के किनारे बना हुआ है। इस किले में कुल 114 कमरे हैं। तीन मंजिलों वाले इस किले में करीब 900 नकली दरवाजें हैं और 100 असली दरवाजें है लेकिन उन्हें इस प्रकार बनाया गया है कि आप भौचक्के रह जाएंगे। इन्हें पहचान पाना बिल्कूल नामुमकिन है। इसीवजह से इसे हजारद्वारी के नाम से जाना जाता है। इन दरवाजों को इसलिए बनाया गया है कि ताकि दुशमनों से राजा की रक्षा किया जा सकें। अगर कोई दुशमन गलती से भी महल के अंदर प्रवेश कर ले तो आसानी से निकल ना सके और भागने से पहले ही उसे पकड़ा जा सके।
नवाब के इस दरबार में अंग्रेजों के शासन काल में प्रशासन संबंधी कार्य भी किए जाते थे। इस महल को अभी संग्रहालय में बदल दिया गया है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का सबसे बड़ा स्थल संग्रहालय माना जाता है। इसमें आपको उस समय की कई वस्तुएं देखने को मिलेंगी। यहां तक कि अकबरनामा का मूल प्रति भी यहां रखी हुई है। दुनिया का सबसे बड़ा झूमर भी इसी महल के दरबार हॉल में लगा हुआ है। महल के परिसर में ही आपको इमामबाड़ा, वासिफ मंजिल, बच्चावाली तोप, घड़ी घर भी देखने को मिलेगा। इस जगह की खासियत ये भी है कि शहर के भीड़-भाड़ से दूर ये स्थित है। आज भी यहां सफर के लिए तांगो का इस्तेमाल किया जाता है। यहां जाकर आपको ऐसा महसूस होगा कि आप आधुनिक समय से दूर नवाबी सभ्यता में जा बसे हैं।
Published on:
20 Dec 2017 04:33 pm
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