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JNU को CV भेजने से रोमिला थापर का साफ इनकार, कहा-विश्वविद्यालय को सड़क छाप बनाया जा रहा है

गरमाया इतिहासकार रोमिला थापर ( Historian Romila Thapar ) CV विवाद थापर ने JNU को CV भेजने से किया इनकार JNU शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय पर लगाए कई आरोप

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नई दिल्ली। इतिहासकार रोमिला थापर ( Romila Thapar ) से 'करिकुलम विटे' ( CV ) मांगने का विवाद लगातार गरमाता जाता रहा है। रोमिला थापर ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( JNU ) को अपना सीवी भेजने से साफ इनकार कर दिया है। बता दें कि कुछ दिन पहले जेएनयू ने थापर से उनका सीवी मांगा था, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है।

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रोमिला ने जेएनयू को इस संदर्भ में खत लिखकर साफ किया है कि उनका सीवी भेजने का कोई इरादा नहीं है। थापर ने कहा कि जब विश्वविद्यालय की तरफ से उन्हें एमेरिटस प्रोफेसर का पद दिया गया था तो उस समय कहा गया था कि ये पद उनके लिए आजीवन है। अब ये लोग नियमों को बदल कर नए तरीके से लागू कर रहे हैं।

इतिहासकार ने कहा कि ये पद किसी को उसके अब तक के लिए किए काम के आधार पर दिया जता है। ये भविष्य की उम्मीदों पर कैसे आधारित हो सकता है? थाप ने कहा कि ये लोग जेएनयू को सड़क छाप संस्था बना रहे हैं। विश्वविद्यालय में जो हो रहा है अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर किया जा रहा है। मेरा रूख साफ है मैं इन चीजों के आगे झुकने वाली नहीं।

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जेएनयू का पक्ष

जेएनयू का कहना है कि पहले जो नियुक्तिया हुई थी उनमें कई खामियां थीं। ये नए नियम प्रक्रिया को व्यपाक बनाने के लिए अपनाया गया, जिसके आधार पर अधिक से अधिक प्रोफेसर एमेरिटी नियुक्त किए जा सकें।

JNU शिक्षक संघ ने क्या कहा

वहीं, जेएनयू शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया था कि वह इतिहासकार रोमिला थापर को अपना सीवी जमा करने के लिए भेजे गए पत्र को लेकर सफेद झूठ फैला रहा है। शिक्षक संघ ने मांग की थी कि जिन 12 प्रोफेसर एमेरिटी को ऐसे पत्र भेजे गए थे, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए और सभी से निजी तौर पर माफी मांगी जाए।