नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में सेना के हुई मुठभेड़ में मारा गया आतंकी बुरहान वानी भी मुस्लिम उपदेशक जाकिर नाइक का फैन था। बता दें कि बुरहान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहता था। ट्वीटर पर वह 119 लोगों को फॉलो करता था, वहीं 369 लोग उसे फॉलो करते थे। अपने आखिरी ट्वीट में बुरहान ने जाकिर नाइक को समर्थन देने की अपील की थी।
शुक्रवार को ही बुरहान ने जाकिर नाइक की एक तस्वीर ट्वीट की और उसके साथ लिखा कि सपोर्ट जाकिर नाइक, ऑर टाइम विल कम व्हेन कुरान रिसाइटेशन विल भी बैन्ड, यानी जाकिर नाइक का समर्थन कीजिए, वरन ऐसा समय भी आ जाएगा जब कुरान पढऩे पर भी पाबंदी लगा दी जाएगी। बता दें कि बीते कुछ समय से खुफिया एजेंसियां बुरहान की सोशल मीडिया एक्टिविटिज पर नजर बनाए हुई थीं।
अब मुसलमानों से मदद की गुहार लगा रहा नाइक
उधर, भड़काऊ भाषणों के भारत और बांग्लादेश में शुरु हुई जांच के बाद जाकिर नाइक ने दुनियाभर के मुस्लिमों से उन्हें समर्थन देने की बात कही गई है। जाकिर ने फेसबुक और ट्वीटर पर दो नए एकाउंट खोले हैं। इसमें लिखा है कि मैं डॉण् जाकिर नाइक सभी मुस्लिम भाइयों और बहनों से अपील करता हूं कि मीडिया ट्रायल के खिलाफ मुझे सपोर्ट करें और इंसाफ दिलाने में मदद करें। बता दें कि नाइक इसलिए जांच के घेरे में हैं, क्योंकि पिछले दिनों ढाका में आतंकी हमले में शामिल हमलावर उनसे प्रभावित थे। ट्विटर पर बनाए अकाउंट से जाकिर ने पिछले 24 घंटों में नौ ट्वीट किए।
जाकिर को कहां से होती है फंडिंग, जांच कमेटी बनी
वहीं केंद्र सरकार ने जाकिर नाइक की एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को मिलने वाली फंडिंग की जांच के आदेश दे दिए हैं। गृह मंत्रालय के आदेश पर जांच इस सिरे के होगी कि फाउंडेशन को पैसा कहां से मिलता है। जाकिर नाईक के संगठन पर आरोप है कि उसे विदेश से पैसा मिलता है, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों और युवाओं को आतंक की तरफ खींचने के लिए किया जाता है। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने नाईक ने भाषणों की जांच के आदेश भी दिए हुए हैं। यह आदेश उस बात के सामने आने के बाद दिया गया जिसमें पता लगा था कि बांग्लादेश के ढाका में हमला करने वाले लड़के जाकिर नाईक से प्रेरित थे।
नाइक का बिहार के किशनगंज से भी रहा नाता
नाइक ने बिहार के किशनगंज समेत कई मुस्लिम बाहुल्य इलाकों का दौरा कर सभाएं की थी। धर्मगुरु नाइक किशनगंज में चार वर्ष पहले आया था। किशनगंज की एक शिक्षण संस्थान ने नाइक को वर्ष 2012 में यहां आने का निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए तीन दिनों तक 30 मार्च से एक अप्रैल तक इस इलाके में रहे और कई सभाएं की थी । नाइक की सभा को शांति सभा का नाम दिया गया था। उनकी सभा में असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल के क्षेत्रों के करीब दस लाख लोगों ने भाग लिया था। बता दें कि पटना के गांधी मैदान और गया बलास्ट के आतंकियों के पास से भी नाइक की किताबें मिली हैं। वहीं आतंकियों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कुख्यात रहे दरभंगा के बाढ़ मसैला गांव की एक लाइब्रेरी में भी नाइक की किताबें मिली थीं।
नाइक के समर्थन में उतरा ये पुलिसवाला
उधर, नाइक के समर्थन में एक मुंबई पुलिस के पूर्व एसीपी शमशेर पठान उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि वो जाकिर नाइक को कानूनी मदद देने के लिए तैयार हैं। पठान की पहचान यह है कि अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का गुर्गा छोटा शकील जब एकमात्र बार मुंबई में गिरफ्तार हुआ था, तो इन्होंने ही उसकी गिरफ्तारी की थी। पठान अवामी विकास पार्टी नाम का एक राजनीतिक दल भी चलाते हैं। इनका कहना है कि जाकिर नायक को अगर किसी भी तरह की कानूनी मदद की जरूरत पड़ी तो यह उसको सहयोग देंगे।
आईबी ने जाकिर नाईक पर गृह मंत्रालय को 3 बार किया था अलर्ट
विवादास्पद भारतीय इस्लाम प्रचारक जाकिर नाईक पर आईबी वर्ष 2009 से लगातार नजर रख रही है। खुफिया एजेंसी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि 2009 से 2014 तक आईबी ने तीन बार गृह मंत्रालय को अलर्ट भी किया था, लेकिन उसके विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। इंटेलीजेंस ब्यूरो ने नाईक के भाषणों को भड़काऊ बताते हुए उसके खिलाफ एक्शन लेने की सिफारिश की थी। परन्तु तत्कालीन सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। नाईक के भाषणों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि उनके भाषणों पर नजर रखी जा रही है।
आईबी ने प्रवर्तन निदेशालय से किया था चंदे की जांच का आग्रह
इंटेलीजेंस ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में जाकिर नाईक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को मिलने वाले विदेशी चंदे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस चंदे का उपयोग सामाजिक कामों के बजाय धार्मिक कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार देश का गृह मंत्रालय जाकिर नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को विदेशी चंदे के लिए मिला एफसीआएए लाइसेंस जल्दी ही रद्द कर सकता है। जाकिर नाईक मुस्लिम धर्मावलंबियों से जकात के रूप में चंदा देने की अपील भी करते हैं जिसका उपयोग इस्लाम के प्रचार-प्रसार में किया जाता है।