
प्रदूषण: सिर्फ डीजल वाहनों पर लगे पाबंदी तो कम हो सकता है दिल्ली की हवा में घुला जहर
नई दिल्ली। दिल्ली की हवा में घुले जहर ने सभी को परेशान कर रखा है। गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली वायु गुणवक्ता का गिरता स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनाई गई पर्यावरण प्रदूषण ( रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण हालात पर काबू पाने के लिए रोज नए-नए उपाय खोज रही है। प्राधिकरण द्वारा बनाई गई टाक्स फोर्स प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए डीजल वाहनों पर रोक लगाने की सोच रही है।
सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि शहर की हालत में सुधार के लिए गैर-सीएनजी वाहनों को बंद करने की जगह केवल डीजल वाहनों को बंद करने की जरूरत है। बोर्ड का कहना है कि पेट्रोल की तुलना में डीजल वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। इन वाहनों पर रोक लगाकर भी हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
डीजल वाहनों पर रोक!
टास्क फोर्स के सदस्य और हेल्थ एक्सपर्ट (स्वास्थ्य विशेषज्ञ) ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि राजधानी दिल्ली में गैर-सीएनजी वाहनों को बंद कर पाना असंभव है। लेकिन खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण को कम करने के लिए अगर डीजल वाहनों पर रोक लगा दी जाए तो भी हालात काफी सुधर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने आगे बताया कि टास्क फोर्स ने पिछली मीटिंग में डीजल वाहनों पर बैन लगाने को लेकर चर्चा की थी। लेकिन उन्होंने बताया कि अभी ऐसी सुविधा नहीं हो पाई है कि यह पहचाना जा सके की कौन सी गाड़ी डीजल की है और कौन सी पेट्रोल की।
19 नवंबर से और खराब होगी दिल्ली की हवा
दिल्ली और आस-पास के इलाके में हुई बारिश के बाद प्रदूषण का स्तर कुछ कम हुआ है। लेकिन पर्यावरण प्रदूषण प्राधिकरण के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 19 नवंबर तक 'खराब' और 'बेहद खराब' के स्तर पर बना रहेगा। वहीं, डीजल वाहनों पर पूरी तरह पाबंदी की ऐसी कोई नीति तुरंत अमल में लाई जाए फिलहाल यह संभव नहीं दिखता। टास्क फोर्स के सदस्य और हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि अगली बैठक में टास्क फोर्स 'ग्रेडेड रेस्पॉन्स ऐक्शन प्लान' पर चर्चा करेगी। इस मीटिंग में हम वाहनों पर बैन और ऑड-इवन रोड प्रस्ताव पर भी चर्चा करेंगे।
Published on:
17 Nov 2018 10:01 am
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