
नई दिल्ली। अहमद अली जब अपने बचपन में थे तब गरीबी की मार ने उन्हें स्कूल नहीं जाने दिया। इसके बाद इनके जीवन में बड़ी कठिनाइयां और मजबूरियां आईं जिनकी वजह से उन्हें रिक्शा चलाना पड़ा लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि जो उनके साथ हुआ है वो किसी और के साथ नहीं होने देंगे। इसके लिए उन्होंने दृढ़ उद्देश्य के साथ और अपने खून-पसीने की कमाई से एक नहीं बल्कि 9 स्कूल खड़े कर डाले।
असम के करीमगंज जिले के रहने वाले अली ने रिक्शा खींचकर अपने परिवार को आर्थिक तरीके से मदद के साथ-साथ यह कारनामा भी कर दिखाया। आज अली 70 के हो गए हैं, अली को अपने पेशे पर गर्व है, लेकिन शिक्षित नहीं हो पाने का अफसोस उन्हें आज तक है। उन्होंने 4 साल पहले 1978 में एक प्राथमिक विद्यालय स्थापित कर अपने सपने को साकार करने की शुरुआत की। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अपने खानदान की एक जमीन को बेचकर और कुछ जगहों से चंदा लेकर पहला स्कूल बनवाया था। अली का लक्ष्य है कि वे 10 स्कूलों का निर्माण कराएं आज वो अपने इस सपने से बस एक कदम दूर हैं क्योंकि उन्होंने अब तक पूरे 9 स्कूलों का निर्माण करा दिया है। इस क्रम में उन्होंने तीन प्राथमिक विद्यालय, पांच माध्यमिक विद्यालय और अपने गांव में एक हाई स्कूल का निर्माण कराया है।
अली कहते हैं, "मैं बूढ़ा हो गया हूं और अब मैं शिक्षा के माध्यम से अपने गांव को विकसित करना चाहता हूं।" इतना ही नहीं अली अब गांव में एक कॉलेज का सपना भी अपने साथ लिए चल रहे हैं। अली के विद्यालय से पास हुए कुछ बच्चे आज अच्छी नौकरी भी कर रहे हैं अपने गांव की यह तरक्की देख अली की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। यह अली का दृढ़ संकल्प ही था जिससे वे यह कर पाए। इतना करने के बाद भी अली ने कभी स्कूलों को बनवाने का श्रेय नहीं लिया। ग्रामीणों के बहुत आग्रह के बाद उस क्षेत्र में उनके नाम का एक स्कूल बनवाया गया।
Published on:
07 Mar 2018 12:05 pm
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