
कारगिल युद्ध में नवाज शरीफ ने नहीं दिया साथ: परवेज मुशर्रफ
इस्लामाबाद।कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की करारी शिकस्त हुई थी। मगर इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी हार की टीस को भूल नहीं पाता है। यहां के पूर्व हुकमरान कारगिल युद्ध को निर्णायक युद्ध मानते हैं और कहते है कि अगर इसे जीत लिया जाता तो भारत के लिए यह बड़ा झटका होता। पाक के पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने इस साल मई में एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि कारगिल युद्ध में सेना की मजबूत स्थिति के बावजूद उसे वापस बुला लिया गया। उन्होंने कहा कि पाक के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के निर्देश के कारण सेना को पीछे हटना पड़ा।
पाकिस्तान में कई मामलों का सामना कर रहे 74 वर्षीय सेवानिवृत जनरल पिछले साल से दुबई में रह रहे हैं। उन्हें चिकित्सा के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति दी गई थी। इस दौरान ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के प्रमुख मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध में हार के लिए पूर्व पीएम को दोषी ठहराया है। उन्होंने पाकिस्तान सेना के पीछे हटने के लिए नवाज शरीफ को जिम्मेदार ठहराया है।
युद्ध में पाकिस्तान मजबूत स्थिति में था
इस युद्ध और तत्कालीन घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस लड़ाई में पांच अलग-अलग स्थानों पर मजबूत स्थिति में था और तत्कालीन प्रधानमंत्री को कम से कम दो बार इस स्थिति के बारे में बताया गया। उन्होंने शरीफ के इस दावे को खारिज कर दिया कि कारगिल से पाकिस्तानी सेना के हटने के बारे में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया।
भारत सरकार के दबाव में थे नवाज शरीफ
मुशर्रफ ने एक वीडियो बयान देकर कहा कि वह मुझसे पूछते रहे कि क्या हमें वापस आ जाना चाहिए। पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक ने यह भी कहा कि तत्कालीन सीनेटर राजा जफारुल हक तथा तत्कालीन गृह मंत्री चौधरी शुजात ने भी सेना के वापस लौटने का विरोध किया था, मगर अमरीका से लौटने के बाद शरीफ ने सेना के कारगिल से पीछे हटने का आदेश दिया। शरीफ भारत सरकार के दबाव में थे।वहीं शरीफ इस युद्ध के लिए मुशर्रफ को दोषी ठहराते हैं। उनका कहना है कि सेना ने बिना उनकी इजाजत से कारगिल युद्ध छेड़ा था। युद्ध के तुरंत बाद नवाज को सेना ने हटा दिया था।
Published on:
26 Jul 2018 10:26 am
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