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चीन की हरकतों पर नजर रखने के लिए लद्दाख में ऊंटों पर गश्त करेगी सेना

वर्तमान में सेना सामान ढोने के लिए गधों और खच्चरों का इस्तेमाल करती है।

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नई दिल्ली। सीमा पर घुसपैठ की घटनाएं कम हों, इसके लिए सेना कई तरह के प्रयास करती है। इसी के तहत अब सेना ने एलएसी पर नजर रखने के लिए ऊंटों का सहारा लेने की योजना बनाई है। इसके अनुसार भारतीय सेना लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ पर नजर रखने के लिए ऊंटों पर पेट्रोलिंग करेगी।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- डोकलाम विवाद के कुछ महीनों के बाद घुसपैठ पर नजर रखने के लिए सेना ने एलएसी पर एक और दो कूबड़ वाले ऊंटों को तैनात करने की योजना बनाई है। इस काम में शामिल होने वाले ऊंटों को लंबे समय तक गश्त करने, गोला-बारूद और भारी भार उठाने के लिए तैयार किया जाएगा।

बता दें, अब तक सेना इस काम के लिए गधे और खच्चरों का इस्तेमाल करती है। ये चालीस किलोग्राम तक ही सामान उठा पाते हैं, जबकि ऊंट 180 से 220 किलो भारी सामन उठाएंगे। अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। यदि योजना सफल होती है, तो इस क्षेत्र में भारतीय सैन्य संगठन ऊंटों का इस्तेमाल करेंगे।

करीब 15000 फुट की ऊचाई इलाके में ऊंटों के प्रयोग से भारतीय सेना को बड़ी मदद मिल सकती है। जानकारी के अनुसार- दो कूबड़ वाले ऊंट समतल भू-भाग पर 10 से 15 किमी की दूरी दो घंटे में तय कर लेते हैं। इसके साथ ही ऊंटों की ऊंचाई का भी भारतीय सेना को लाभ मिलेगा, इससे दूर तक दुश्‍मन पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी। दो कूबड़ वाले ऊंट बेहद खास नस्‍ल के होते हैं, ये लद्दाख की नूब्रा घाटी में पाए जाते हैं।

यहां है ज्यादा चुनौती
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सिक्किम-तिब्‍बत-भूटान ट्राई जंक्‍शन पर भी लंबे समय से हालात डोकलाम जैसे बने हुए हैं। यहां पर चीन तेजी से सड़कें बनवा रहा है। इतना ही नहीं, इस इलाके उसके सैनिकों की मौजूदगी भी ज्‍यादा है। इस क्षेत्र को लेकर चीन किस हद तक साजिश कर रहा है, उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब डोकलाम में विवाद चल रहा था, तब चीन की सेना इसी क्षेत्र से करीब तिब्‍बत के एक इलाके में सैन्‍य अभ्‍यास कर रही थी।


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