
नई दिल्ली। आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति की गिरफ्तारी पर अब दो अप्रैल तक की रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक बढ़ा दी है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय के उस अधिकार क्षेत्र की जांच कर रहा है जिसमें पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत गिरफ्तारी करने का उसे अधिकार मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट में ऐसे हुई चर्चा
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ को सोमवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ईडी के पास कानून के तहत गिरफ्तार करने का अधिकार है। मेहता की दलील सुनने के बाद पीठ ने कहा कि कार्ति को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने के लिए 15 मार्च को जारी किये गये अंतरिम आदेश को दो अप्रैल तक बढ़ाया जा रहा है। पूर्व में जारी आदेश में सोमवार तक अंतरिम सुरक्षा दी गई थी। सुनवाई दो अप्रैल को भी जारी रहेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट से इन शर्तों पर मिली जमानत
कार्ति को इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। इसके साथ ही जमानत पर रहने के दौरान उन्हें देश छोड़ने और बैंक अकाउंट बंद करवाने की इजाजत नहीं है। साथ ही उन्हें गवाहों पर दबाव नहीं बनाने और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने का भी आदेश दिया गया। इस दौरान कार्ति को सीबीआइ को जांच में सहयोग करना होगा। हाईकोर्ट ने कहा था कि जमानत मिलने के बाद ईडी कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय दोनों को नोटिस जारी किया था।
इन आरोपों का सामने कर रहे हैं कार्ति चिदंबरम
आइएनएक्स मीडिया के पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने आरोप लगाया था कि कार्ति ने विदेश निवेश के लिये एफआइपीबी (फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड) से मंजूरी के लिये उनसे 10 लाख डॉलर (करीब 650 करोड़ रुपए) की रिश्वत मांगी थी। आपको बता दें कि इस दौरान कार्ति के पिता पी चिदंबरम यूपीए सरकार में मंत्री थी। इंद्राणी के मुताबिक कार्ति से यह मुलाकात दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में हुई थी। आरोप है कि एफआइपीबी से मंजूरी दिलाने में नियमों का उल्लंघन किया गया था।
Published on:
26 Mar 2018 09:58 pm
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