
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा सीलिंग संकट से व्यापारियों को राहत प्रदान करने के लिए शहर की 351 सड़कों को वाणिज्यिक और मिश्रित उपयोग की सूची में रखने के संबंध में एक अधिसूचना दाखिल की है। सरकार के एक प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने कहा, "दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 351 सड़कों को लेकर अधिसूचना दाखिल की है।" फिलहाल, सीलिंग के तहत कार्रवाई इन 351 सड़कों को छोड़कर हो रही है। यह कार्रवाई बिना कनवर्जन शुल्क दिए आवासीय क्षेत्रों का वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की वजह से की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति यह कार्रवाई कर रही है और इसे भाजपानीत तीन नगर निगमों में लागू किया जा रहा है।
अदालत को अब सीलिंग के तहत कार्रवाई करने के लिए वाणिज्यिक और मिश्रित उपयोग की सूची में बदलाव की मंजूरी देनी होगी। बता दें कि भाजपा के नेतृत्व वाले दिल्ली के तीनों नगर निगमों में निगरानी समिति के दिशा-निर्देश पर सीलिंग अभियान चल रहा है। यह व्यावासयिक उद्देश्यों के लिए आवासीय संपत्तियों के इस्तेमाल और इसके लिए कन्वर्जन शुल्क नहीं देने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ किया जा रहा है। पिछले सप्ताह एक बैठक के बाद आप और कांग्रेस ने कहा था कि सीलिंग मामले का समाधान निकालने के लिए निगरानी समिति के साथ एक सर्वदलीय बैठक होगी।
28 मार्च को रामलीला मैदान में ट्रेड यूनियन की महारैली
वहीं दिल्ली में चल रही सीलिंग के खिलाफ ट्रेड यूनियन ने कहा है कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई इस समस्या का समाधान नहीं निकाला तो हम सड़कों पर उतरकर धरना देंगे। हालांकि, दिल्ली के ट्रेड यूनियन सीलिंग के खिलाफ मुहिम में जुटने लगे हैं। ट्रेड यूनियन ने कहा है कि वो 28 मार्च को रामलीला मैदान होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए व्यापारियों को एकत्रित करेंगे। ट्रेड यूनियन की ओर से रैली को अधिक सफल बनाने के लिए और रामलीला मैदान तक व्यापारियों के पहुंचने के लिए 500 से अधिक बसों का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा ई रिक्शा, होर्डिंग, बैनर, पोस्टर से भी प्रचार किया जा रहा है। पूरी दिल्ली को 11 जोन में बांटकर अलग अलग टीमें बनाई गई हैं। जानकारी के मुताबिक, रैली को 2500 छोटे बड़े व्यापार संगठनों ने समर्थन दिया है।

Published on:
26 Mar 2018 06:37 pm
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