WhatsApp पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, कहा- ‘दिक्कत है तो मत करो इस्तेमाल’

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को व्हाट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की
  • कोर्ट ने कहा- व्हाट्सऐप एक प्राइवेट ऐप है और अगर आपको गोपनियता के बारे में ज्यादा चिंता है तो आप इसे छोड़ दें और दूसरे ऐप पर चले जाएं

नई दिल्ली। इंस्टेंट मेसेजिंग सर्विस ऐप WhatsApp की नई डेटा और प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 14 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें अदालत से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। आज दिल्ली हाई कोर्ट में इस याचिका सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई 25 जनवरी को होगी।

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डर है तो बंद कर दें इस्तेमाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वॉट्सऐप प्राइवेट ऐप है अगर उन्हें कोई दिक्कत है तो उसका इस्तेमाल करना बंद कर सकते हैं।कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘व्हाट्सऐप एक प्राइवेट ऐप है और अगर आपको गोपनियता के बारे में ज्यादा चिंता है तो इसे छोड़ दें और दूसरे ऐप पर चले जाएं।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि शायद ही आपने किसी भी ऐप की कोई भी नीतियां पढ़ी है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा, 'केवल व्हाट्सऐप ही नहीं, सभी एप्लिकेशन ऐसा करते हैं। क्या आप Google Map का उपयोग करते हैं? ये भी आपके डेटा को कैप्चर और साझा करता है?

पूरी दुनिया में साझा हो रहा हमारा डेटा

कोर्ट ने साथ ही उनसे पूछा अब भी आपको लगता है कि आपके डेटा से क्या समझौता किया जा रहा है? जिसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा कि वॉट्सऐप यूरोपीय देशों और अमेरिका में नई प्राइवेसी पॉलिसी के इस्तेमाल के लिए ऑप्शन देता है, लेकिन भारत में इसके लिए कोई ऑप्शन है। ये हमारा डेटा अपने फायदे के लिए पूरी दुनिया में साझा करता है, जो गलत है।वहीं इस याचिका के लिए वॉट्सऐप की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि ये ऐप पूरी तरह से सुरक्षित है। एन्क्रिप्टेड की वजह से आप बिना डर के अपनों से बातें कर सकते हैं।

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वॉट्सऐप ने बढ़ाई प्राइवेसी पॉलिसी की डेट

बता दें वॉट्सऐप भी अपने इस नई डेटा और प्राइवेसी पॉलिसी के विरोध को देखते हुए अपनी डेडलाइन को 8 फरवरी से बढ़ाकर 15 मई कर दिया है। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि, हमारी नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर काफी अफ़वाह फैलाएं जा रहे हैं इसलिए इसके समय को फिलहाल के लिए बढ़ाया जा रहा है।

 

Vivhav Shukla
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