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केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए झारखंड हाईकोर्ट का अनोखा तरीका, जमानत के लिए राहत कोष में रकम दो

भयावह बाढ़ की मार से जूझते दक्षिण भारतीय राज्य केरल की मदद के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने एक अनोखा तरीका अपनाया है।
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नई दिल्ली

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Amit Kumar Bajpai

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Updated: 28 Aug 2018, 2:58 PM IST

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रांची। भयावह बाढ़ की मार से जूझते दक्षिण भारतीय राज्य केरल की मदद के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। यहां हाईकोर्ट ने तीन व्यक्तियों की अग्रिम जमानत की याचिका स्वीकार करने के लिए एक शर्त लगा दी कि पहले उन्हें केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष में रकम जमा करनी होगी।

झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस एबी सिंह ने सोमवार को देखा कि बाढ़ की मार का सामना कर रहे केरल को अभी भी बहुत राहत की जरूरत है। इसके बाद जस्टिस सिंह ने धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले में अग्रिम जमानत लेने आए उत्पल रे को इस शर्त पर अनुमति दे दी कि वो केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष में 7,000 रुपये जमा करेंगे। वहीं, फर्जीवाड़े के आरोपी धनेश्वर मंडल और संभू मंडल की याचिका को भी हाईकोर्ट ने प्रतिव्यक्ति पांच हजार रुपये राहत कोष में जमा करने की शर्त पर मंजूर कर लिया।

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इस संबंध में अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को राहत कोष में रकम जमा किए जाने के सबूत भी पेश करने जरूरी होंगे, ताकि पता चले कि वाकई बाढ़ पीड़ितों की मदद हुई है। इस संबंध में झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव हेमंत कुमार सिकरवार ने कहा कि मध्य प्रदेश और कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी कुछ मामलों में इसी तरह के निर्देश दिए हैं ताकि केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत कोष में रकम जमा हो सके।

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गृह मंत्रालय के नेशनल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर (एनईआरसी) के मुताबिक केरल में 443 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 जिलों के 54 लाख 11 हजार लोग अब तक की सबसे भयावह बाढ़ और बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए। इसके चलते दक्षिण भारतीय राज्य के 47,727 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी फसल तबाह हो गई।