भारतीय सेना का नया 'अजेय' बख्तरबंद, 50 किलो टीएनटी भी कुछ न बिगाड़ पाएगा

  • भारतीय सेना को हर हालात और खतरनाक इलाके में सुरक्षित पहुंचाने में सक्षम।
  • कल्याणी एम4 ( Kalyani M4 ) आर्मर्ड व्हीकल हर हालात में रहेगा सुरक्षित।
  • पुलवामा हमले के बाद महसूस हुई जरूरत, रक्षा मंत्रालय ने दी खरीद को मंजूरी।

नई दिल्ली। न गोलियों की बौछार से और न लैंडमाइन के वार से। न सड़क पर न जंगल में। भारतीय सेना में शामिल होने जा रहा कल्‍याणी एम4 (Kalyani M4) ऐसा बख्तरबंद वाहन है जो हर हालात में भारतीय सेना का वर्चस्व कायम रखेगा। मेक इन इंडिया के तहत भारतीय सेना में शामिल किया जाने वाला यह बख्तरबंद वाहन 50 किलो टीएनटी विस्‍फोटक से भी सुरक्षा दे सकता है। इससे सेना को किसी भी इलाके में सुरक्षित पहुंचने में मदद मिलेगी।

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पुलवामा हमले के बाद रक्षा मंत्रालय ने ऐसे वाहन की तलाश शुरू कर दी थी जिसका प्रयोग हर स्थिति में किया जा सके। चाहे फिर वह आतंक से प्रभावित क्षेत्र हो या उग्रवाद से रौंदा इलाका। नक्सल प्रभावित जंगल हो या फिर चीन और पाकिस्तान जैसे देश के दुश्मनों से मुकाबला। ऐसे में यह बख्तरबंद वाहन भारतीय सेना के हर पैमाने पर खरा उतरा है।

इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने आपात खरीद प्रक्रिया के तहत भारत फोर्ज लिमिटेड को 177.95 करोड़ रुपए का ठेका दिया है ताकि वह कल्‍याणी एम4 सप्‍लाई कर सके। इन्‍हें सबसे पहले लद्दाख में तैनात करने की भी तैयारी की गई है।

ऐसा है बख्तरबंद कल्‍याणी एम4?

  • 16 टन है इस वाहन का वजन
  • 2.3 टन वजन इसका भारवहन
  • 140 किलोमीटर प्रतिघंटा है रफ्तार
  • 800 किलोमीटर तक है इसकी रेंज
  • 16 किलोवाट का अंदर लगा है एसी
  • 10 किलो एंटीटैंक माइन का असर नहीं
  • 43 से 44 डिग्री एंगल तक कहीं मुड़ जाए
  • -20 से प्लस 50 डिग्री में कारगर
  • मोनोकॉक डिजायन यानी सारी सुविधा अंदर
  • शीशे इतने मजबूत कि स्नाइपर न भेद पाए
  • छह सिलेंडर का टर्बोचार्ज्‍ड डीजल इंजन
  • मशीनगन का फायर भी झेल सकती है

ऐसे वाहन की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सबसे ज्यादा वाहन आधारित आइईडी और सड़क पर आइईडी के घटनाक्रम से भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर में जूझना पड़ रहा है। दो साल पहले हुए पुलवामा हमले में हम यह देख चुके हैं कि किस तरह से एक आत्मघाती ने सैन्यबल के काफिले को उड़ा दिया था।

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उस आतंकी हमले के बाद एक ऐसे बख्तरबंद वाहन की जरूरत महसूस हुई। जिस पर धमाकों को असर कम से कम हो। इतना ही नहीं इस दौरान वाहन की गति भी बेहतर हो और रखरखाव आसान हो। Kalyani M4 इसमें बेहतर बनकर उभरा और ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने इसकी खरीद पर मोहर लगा दी।

अमित कुमार बाजपेयी
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