
केरल: हिंदुओं ने पेश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल, नमाज के लिए खोला मंदिर का कपाट
नई दिल्ली। केरल की बाढ़ में एक मस्जिद डूब जाने से बकरीद के दिन सैकड़ों लोगों के सामने नमाज अता करने का संकट उठ खड़ा हुआ। ऐसे में हिंदुओं ने सांप्रदायिक सद्भावना का एक उदाहरण पेश कर सबको चौका दिया। माला के पास ईरावतूर में पुरुपिलिकव रक्तेश्वरी मंदिर के अधिकारियों ने कोचुकाडव महल मस्जिद में पानी भरा होने के कारण मंदिर से जुड़े एक हॉल ईद-अल-अजहा की नमाज के लिए खोल दिया। इसके बाद 300 से ज्यादा लोगों ने ईद की नजाम अता कर राहत की सांस ली।
बाढ़ के पानी में डूबी मस्जिद
दरसअसल, माला के पास ईरावतूर की मस्जिद बाढ़ के पानी में डूब गई थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए हिंदुओं ने बकरीद की नमाज के लिए पास के ही एक मंदिर के दरवाजे मुसलमानों के लिए खोल दिए। यहां के पुरुपिलिकव रक्तेश्वरी मंदिर के अधिकारियों ने मंदिर से जुड़े एक हॉल ईद-अल-अजहा की नमाज के लिए खोल दिया, क्योंकि पास के कोचुकाडव महल मस्जिद में पानी भरा हुआ था। अगर मंदिर के अधिकारी यह निर्णय नहीं लेते तो सैकड़ों लोग बकरीद के पावन अवसर पर नमाज अता नहीं कर पाते।
हॉल को बनाया अस्थायी ईदगाह
इस मंदिर का संचालन श्री नारायण धर्म परिपाल योग (एसएनडीपी) द्वारा किया जाता है। इस मंदिर में पहले से ही केरल में बाढ़ राहत शिविर के रूप में काम कर रहा है। इस क्षेत्र में राहत कार्य को लेकर सक्रिय अभिनव ने बताया कि मंदिर का हॉल में पहले से ही एक राहत शिविर चलाया जा रहा है। हमने महसूस किया कि लोगों को नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह नहीं है। इसलिए हॉल को अस्थायी ईदगाह (प्रार्थना कक्ष) के रूप में व्यवस्थित करने के लिए इलाके के हिंदू युवा आगे आएं। अभिनव ने बताया कि लोगों ने आस-पास के घरों से नमाज के लिए मैट इकट्ठा किए और अन्य सारी व्यवस्थाएं की। इसके बाद करीब 300 लोगों ने मंदिर में नमाज पढ़ी।
बाढ़ प्रभावितों के लिए विशेष प्रार्थना
आपको बता दें कि ईरावतूर त्रिशूर जिले के सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित स्थानों में से एक है। यहां के राहत शिविरों और आसपास के घरों में 3,000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। यहां तीन राहत शिविर बनाए गए हैं। मंदिर के हॉल में ईद की नमाज का नेतृत्व जसीर दरिमी ने किया। इस दौरान बाढ़ प्रभावित के लिए विशेष प्रार्थना भी की गई।
Published on:
23 Aug 2018 12:46 pm
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