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हदिया न पिता के पास रहेगी न पति के, पढ़ाई करेगी पूरी-सुप्रीम कोर्ट

खचाखच भरे कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हमने आज तक ऐसे मामले पर कभी सुनवाई नहीं की है।

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जे वेंकटेशन/संजय कुमार
नई दिल्ली: केरल के लव जिहाद के मामले पर अपने तय समय से ज्यादा समय तक सुनवाई करते हुए लडक़ी हदिया से सवाल पूछने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के सलेम जिले में स्थित शिवराज होम्योपैथिक कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने के लिए जाने का आदेश दिया है। करीब दो घंटे तक चली सुनवाई में शीर्ष कोर्ट ने कॉलेज के डीन को इसका स्थानीय अभिभावक नियुक्त किया है। कोर्ट ने कहा है कि ये कोर्स 11 महीने का है और हदिया के साथ कॉलेज वैसे ही पेश आएगी जैसे बाकी छात्रों के साथ। हदिया कॉलेज के हॉस्टल में रहेगी और हॉस्टल के नियमों का पालन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज के डीन को आदेश दिया कि अगर कोई समस्या आती है तो वो सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। मामले की सुनवाई जनवरी के तीसरे सप्ताह में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केवल ये चाहते हैं कि अनुच्छेद 21 यानी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का पालन हो और जब हदिया इस कोर्ट से बाहर जाए तो वो जहां जाना चाहे स्वतंत्र होकर जाए।


हादिया के पिता के वकील ने की गोपनीय सुनवाई की मांग
सुनवाई के शुरू होते ही हदिया उर्फ अखिला के पिता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने इस मामले की गोपनीय सुनवाई की मांग की। इन्होंने कहा कि हदिया की जान खतरे में है। ये मामला सांप्रदायिक रंग ले चुका है। हदिया मीडिया को अपना बयान दे चुकी है। इसके पीछे बड़े-बड़े संगठनों का हाथ है। इसके बयान गोपनीय तरीके से होना चाहिए। हदिया के पिता की तरफ से एक आडियो क्लिप का ट्रांसक्रिप्ट पेश किया गया। इस आडियो के ट्रांसक्रिप्ट पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इसकी सत्यता कैसे साबित होगी। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एएसजी मनिंदर सिंह ने कहा कि एनआईए की रिपोर्ट काफी गंभीर है।इन्होंने कहा कि गोपनीय सुनवाई करने पर फैसला करना कोर्ट का अधिकार है। एएसजी ने कहा कि ऐसे 11 मामले हुए हैं जिनमें 7 एक ही संगठन सत्यसरिणी के जरिये हुए हैं। इसे प्रोग्रामिंग करते हैं। ये सब कोर्ट के सामने रखना चाहिए। इन्होंने कहा कि वे साबित कर सकते हैं कि हदिया का पति आईएसआईएस से जुड़ा हुआ है।

सभी पक्षों की इस तरह दलीलें देने के बाद चीफ जस्टिस ने बार से मदद की अपील की। चीफ जस्टिस ने कहा कि वे कपिल सिब्बल की तरह मदद नहीं चाहते हैं कि जो कहें कि अब हम मदद नहीं कर सकते हैं। हम ये नहीं कह रहे हैं कि हम लड़की से बात नहीं करेंगे बल्कि हम ये कह रहे हैं कि किस स्टेज में इससे बात की जाए। हमें दूसरे मसलों की भी चिंता है लेकिन लडक़ी को इसलिए कैद नहीं रखना चाहिए कि इसने कुछ फैसला किया है। हम केवल ये चाहते हैं कि धारा 21 का पालन हो और जब वो इस कोर्ट से बाहर जाए तो वो जहां जाना चाहे स्वतंत्र होकर जाए।

चीफ जस्टिस बोले, कभी ऐसी सुनवाई नहीं की
खचाखच भरे कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हमने आज तक ऐसे मामले पर कभी सुनवाई नहीं की है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मामले पर बार को हमारी मदद करनी चाहिए। दरअसल केंद्र सरकार और हदिया के पिता एनआईए की सौ पेंजों की रिपोर्ट पर गौर करने के लिए कोर्ट से बार-बार आग्रह कर रहे थे।


‘क्या निजी आजादी की सीमा हो’
हदिया के पति के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हदिया से ये नहीं पूछा जा रहा है कि वो क्या चाहती है न्यूज चैनल्स और फेसबुक पर जो जहर गले जा रहे हैं हम वही देख रहे हैं। ये महिला अपने जीवन के बारे में खुद फैसला करने के लिए स्वतंत्र है । कपिल सिब्बल ने कहा कि जो आडियो ट्रांसक्रिप्ट पेश किया गया है क्या वे इसकी जांच करवाएंगे। कपिल सिब्बल ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में जांच होगी तो ये जांच कैसे चल रही है। ये कोर्ट की अवमानना है । इन्होंने कहा कि किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सांप्रदायिक रंग देना ठीक नहीं है। तब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की क्या सीमा होनी चाहिए।

जस्टिस चंद्रचूड़ बोले, स्टॉकहोम सिंड्रोम भी हो सकता है
कपिल सिब्बल ने कहा कि मान लीजिए कि इसने इस व्यक्ति से शादी करने का गलत फैसला किया, लेकिन ये पूरे तरीके से इसका फैसला है। वो इसका परिणाम भुगतेगी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम ये नहीं कह रहे हैं कि आपके केस में ऐसा है लेकिन स्टॉकहोम सिंड्रोम में ऐसा होता है कि व्यक्ति बालिग होने के बावजूद स्वतंत्र फैसला नहीं कर पाता है।

हदिया के पिता के वकील की दलील
हदिया के पिता के वकील श्याम दीवान ने कहा कि कोर्ट को पहले इस संगठन पर विचार करना चाहिए तब उस लडक़ी से बात करना चाहिए । इसेक बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने पूछा कि क्या आपने कोई रिसर्च किया है कि हम इस महिला से बात करेंगे तब दूसरे मुद्दों पर विचार करेंगे या हम ये मान लें कि वो किसी प्रभाव में है और दूसरे मुद्दों पर विचार कर हम इस महिला से बात करें ?


जब सिब्बल ने मांगी माफी
सुनवाई के दौरान एक बार जब कोर्ट ने कहा कि हम इस मसले पर कल सुनवाई करेंगे। तब कपिल सिब्बल ने कहा कि ये गलत है। हदिया महिला कोर्ट में है और आप कह रहे हैं कि हम इसे कल सुनेंगे। इसे कल भी कोर्ट में आना होगा। इन लोगों ने तीन बार वही बात रखी जो आज रख रहे हैं और आगे भी वही दलील देंगे। कोर्ट उनकी एनआईए जांच की बात खारिज कर चुका है। हम क्या दलील देंगे। तब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आप भले ही कोर्ट से जा सकते हैं लेकिन हम नहीं। हम संविधान से बंधे हैं । ये कोई दलील नहीं है कि आप जो चाहते हैं वही निर्णय करें। हम ये फैसला करेंगे कि आप हमें सहयोग करेंगे या नहीं। इसके बाद कपिल सिब्बल ने कोर्ट से माफी मांगी।


डेढ़ घंटे इसी में लगे कि हदिया से सवाल पूछा जाए या नहीं
केरल के वकील वीवी गिरी ने कहा कि पहले साक्ष्यों को देख लिया जाए इसके बाद लड़की से बात की जाए। अमूमन सुप्रीम कोर्ट में चार बजे सुनवाई खत्म हो जाती है। लेकिन सोमवार को हदिया के मामले में सुनवाई तीन बजे शुरू हुई जो करीब पांच बजे तक चली। डेढ़ घंटे तो इसी में लग गए कि हदिया से सुप्रीम कोर्ट को सवाल पूछना चाहिए कि नहीं । बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हदिया से सवाल पूछे।

यह है मामला
21 नवंबर को हदिया के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में गोपनीय सुनवाई की मांग करने वाली याचिका याचिका दायर की थी। पिछले 3 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस को हदिया :उर्फ अखिला को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की किसी एजेंसी से जांच की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से पूछा था कि क्या किसी कानून में किसी लडक़ी की शादी अपराधी से करने पर रोक है। इस मामले में लडक़ी की मर्जी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वह बालिग है। पिछले 9 अक्टूबर को कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राजनीतिक बयानबाजी करने पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।

केंद्र सरकार के वकील ने किया था विरोध

दरअसल सुनवाई के दौरान कोर्ट में शफीन जहां के वकील दुष्यंत दवे ने कहा था कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री केरल में इस मसले पर राजनीतिक डिबेट कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि केंद्र केरल में शांतिपूर्ण माहौल को खराब कर रही है। एनआईए सरकार के हाथों का खिलौना बन कर रह गई है। दवे ने कहा था कि एनआईए केरल हाईकोर्ट के फैसले को सही क्यों ठहरा रही है। इस दलील का केंद्र सरकार के वकील ने विरोध किया था जिसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि कोर्ट राजनीतिक भाषण के लिए नहीं है, इसकी मर्यादा का ख्याल रखा जाना चाहिए ।

कोर्ट में दलील दर दलील

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़- आपके भविष्य का सपना क्या है ?

हदिया उर्फ अखिला-मैं स्वतंत्रता चाहती हूं।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा- क्या आप सरकार के खर्च से अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं ?

हदिया :उर्फ अखिला- पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं लेकिन सरकार के खर्च पर नहीं। हमारा ध्यान रखने के लिए हमारे पति हैं।
चीफ जस्टिस- क्या आप पढ़ाई के लिए वापस जाना चाहती हैं ?

हदिया उर्फ अखिला- मैं अपने पति को देखना चाहती हूं। हमें विश्वविद्यालय में एक स्थानीय अभिभावक की जरुरत होगी।
चीफ जस्टिस- हम कॉलेज के डीन को अभिभावक नियुक्त कर देंगे।

हदिया उर्फ अखिला- मैं केवल अपने पति को अभिभावक के रुप में चाहती हूं किसी और को नहीं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़- मैं भी अपनी पत्नी का अभिभावक नहीं हूं। पत्नियां चल संपत्ति नहीं होती हैं।

हदिया- पिछले 11 महीनों से मेरा मानसिक शोषण हो रहा है। मैं चाहती हूं कि दिल्ली में अपनी दोस्त के यहां जाकर आराम करूं ।