Krishna Janmashtami 2020 : टॉप 10 प्लेस जहां भगवान कृष्ण के दर्शन तकदीर वालों को होते हैं

 

  • India में Krishna ji Mandir के कई प्रसिद्ध स्थान हैं लेकिन Mathura और Vrindavan के मंदिर की बात ही अलग है।
  • Kerala में स्थित गुरुवयूर मंदिर ( Guruvayoor Temple ) को दक्षिण का द्वारका ( Dwarka ) कहा जाता है।

नई दिल्ली। देशभर भर में कृष्ण जन्माष्टमी ( Krishna Janmashtami ) धूमधाम से मनाने की परंपरा हैं। इस मौके पर लोग नन्हे से बाल गोपाल के दर्शन करने के लिए भारत के विभिन्न मन्दिरों की ओर रुख करते हैं। भारत में कृष्ण जी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां जन्माष्टमी का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। खासतौर से मथुरा और वृंदावन के मंदिर की बात ही अलग है। जन्माष्टमी के अवसर पर इस मंदिर की रौनक तो बस देखते ही बनती है। आइए हम आपको बताते हैं कृष्ण जन्माष्टमी 2020 ( Krishna Janmashtami 2020 ) के लिए देश के टॉप—10 प्लेस ( Top ten place ) जहां के श्रीकृष्ण मंदिर ( ShriKrishna Mandir ) के दर्शन तकदीर वालों को ही होते हैं।

1. द्वारकाधीश मंदिर ( Dwarkadhish Mandir )

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका में है और भगवान कृष्ण को समर्पित है। इसको जगत मंदिर भी कहा जाता है। यहां के प्रवेश द्वार को स्वर्ग द्वार और मोक्ष द्वार भी कहते है। यह मंदिर लगभग 2,500 साल पुराना है। यहां कृष्णा की पत्नी रुकमणी के भी दर्शन कर सकते हैं। द्वारकाधीश का 5 मंज़िला मंदिर 72 पिलरों पर बना हुआ है। यह मंदिर मथुरा में बना है और इसी जगह को भगवान कृष्ण का जन्मस्थान भी माना जाता है। यह मंदिर भगवान कृष्ण के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

2. वृंदावन मंदिर ( Vrindavan Mandir )_

पौराणिक कथायों की माने तो वृंदावन में नंद गोपाल ने अपना बचपन बिताया था। इन्हीं कहानियों को सुनकर सम्राट अकबर वृन्दावन आए थे। यहां आने के बाद उन्होंने यहां 4 मंदिर बनवाने की आज्ञा दी। ये मंदिर थे मदन-मोहन, जुगल किशोर,गोपीनाथ और गोविन्द जी।

3. इस्कॉन मंदिर ( ISKCON Temple )

इस्कॉन मंदिर भारत का वह मंदिर है जहां देशी से ज्यादा विदेशी श्रधालुयों का जमावड़ा रहता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां लाखों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं। एशिया का सबसे बड़ा इस्कॉन मंदिर आईटी सिटी बेंगलुरु में स्थित है। इसके साथ ही आप इस्कॉन मंदिर को दिल्ली, मथुरा, मुंबई और पुणे में भी देख सकते हैं।

4. गुरुवयूर मंदिर ( Guruvayoor Temple )

गुरुवयूर मंदिर को दक्षिण का द्वारका भी कहा जाता है। केरल में स्थित यह मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में मौजूद कृष्ण रूप को स्वयं ब्रह्मा ने भी पूजा था। नव विवाहित जोड़े यहां अपने वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए आशीर्वाद पाने आते हैं।

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5. वेणु गोपाल मंदिर ( Venu Gopal Temple )

वेणु गोपाल मंदिर भी दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कर्नाटक के मैसूर स्थित इस वेणुगोपाल मंदिर का नजारा बहुत ही अद्भुत है। कृष्ण सागर बांध के समीप बने इस मंदिर भगवान वंशीधर बांसुरी बजाते हुए नजर आते हैं।

6. मुंबई दही हांडी ( Mumbai Dahi Handi )

जन्माष्टमी के दौरान दही हांडी का ट्रेंड खासतौर से मुंबई में ही देखने को मिलता है। जिसमें ऊंचाई पर हांडी में दही रखी होती है और बहुत सारे लोग पिरामिड बनाते हैं और कोई एक उस हांडी तक पहुंच कर उसे फोड़ता है। पूरी प्रक्रिया को देखना बहुत ही मजेदार होता है।

7. झुंझुनू ( Jhunjhunu )

जयपुर से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर बसा है झुंझुनू, जहां पिछले 300 से 400 सालों से जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। तीन दिनों तक मनाए जाने वाला इस उत्सव में शामिल होने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। जन्माष्टमी के दिन यहां खाने-पीने से लेकर खिलौने और भी कई चीज़ों के ढेरों दुकानें होती हैं। देर रात तक डांस-गाने का कार्यक्रम चलता है।

8. जगन्नाथ पुरी ( Jagannath Puri )

ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। जन्माष्टमी से अधिक रौनक यहां वार्षिक रथ यात्रा के दौरान होती है। यह रथ यात्रा धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें भाग लेने और भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। हर साल इस रथ यात्रा का आयोजन होता है। इसके लिए तीन विशाल रथ तैयार किए जाते हैं। सबसे आगे बलराम जी का रथ रहता है, फिर बहन सुभद्रा का रथ रहता है और उसके भी भगवान कृष्ण अपने रथ में सवार होकर चलते हैं।

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9. बेट द्वारका मंदिर ( Bet Dwarka Temple )

गुजरात में द्वारिकाधीश के मंदिर के अलावा एक और फेमस मंदिर है बेट द्वारका। वैसे इसका नाम भेंट द्वारका है, लेकिन गुजराती में इसे बेट द्वारका कहा जाता है। भेंट का मतलब मुलाकात और उपहार भी होता है। इस नगरी का नाम इन्हीं दो बातों के कारण भेंट पड़ा। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण की अपने मित्र सुदामा से भेंट हुई थी। इस मंदिर में कृष्ण और सुदामा की प्रतिमाओं की पूजा होती है। सुदामा जी जब अपने मित्र से भेंट करने यहां आए थे तो एक छोटी सी पोटली में चावल भी लाए थे। इन्हीं चावलों को खाकर भगवान कृष्ण ने अपने मित्र की दरिद्रता दूर कर दी थी। इसलिए यहां आज भी चावल दान करने की परंपरा है।

10. केसांवलिया सेठ मंदिर ( Kesanwalia Seth Temple )

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में गिरिधर गोपालजी का फेमस मंदिर है। यहां वे व्यापारी भगवान को अपना बिजनस पार्टनर बनाने आते हैं, जिन्हें अपने व्यापार में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा होता है। भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है जिनका संबंध मीरा बाई से भी बताया जाता है। यहां मीरा के गिरिधर गोपाल को बिजनस पार्टनर होने के कारण श्रद्धालु सेठ जी नाम से भी पुकारते हैं और वह सांवलिया सेठ कहलाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सांवलिया सेठ ही मीरा बाई के वो गिरधर गोपाल हैं, जिनकी वह दिन रात पूजा किया करती थीं।

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