
विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए मिलने वाली सरकारी छात्रवृत्ती पाने में महाराष्ट्र के दलित छात्र सबसे आगे
नई दिल्ली। देश में हर साल छात्रों को पढ़ाई के लिए बाहर जाने के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है। हर साल सैकड़ों छात्र स्कॉलरशिप के तहत विदेश पढ़ने जाते हैं। सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप पाने वाले इन छात्रों में महाराष्ट्र के दलित छात्र सबसे आगे है। बता दें कि हाल के सालों में स्कॉलरशिप पानेवालों की पड़ताल में यह बात सामने आई है। इस जांच में महाराष्ट्र देश के अन्य राज्यों की तुलना में दूसरे नंबर पर है।
स्कॉलरशिप पाने में महाराष्ट्र के छात्र सबसे आगे
वहीं, दूसरे राज्य छात्रवृत्ति पाने में काफी पिछड़े हुए हैं। कर्नाटक और उत्तर प्रदेश इस लिस्ट में शामिल तो हैं लेकिन उनके छह-छह छात्रों का नाम ही इसमें शामिल है। आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र के छात्र लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। साल 2016-17 में कुल 108 फेलोशिप बांटे गए थे, जिनमे 53 छात्र सिर्फ महाराष्ट्र के थें, जिन्होंने छात्रवृत्ति पाई थी। वहीं, यूपी ने आठ और मध्य प्रदेश एवं तमिलनाडु ने पांच-पांच फेलोशिप हासिल किए थे। महाराष्ट्र एक-दो नहीं बल्कि पिछले तीन सालों से फेलोशिप पानेवाले छात्रों की संख्या में सबसे आगे है। दूसरे राज्यों के हिस्से में 0 से 4 फेलोशिप्स ही हाथ लगे थे।
सामाजिक न्याय मंत्रालय छात्रवृत्ति के लिए देता है फंड
आपको बता दें कि अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए नैशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (एनओएस) फंड सामाजिक न्याय मंत्रालय देता है। एओएस की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति के तहत छात्रों का चयन विदेशी यूनिवर्सिटियों में मास्टर लेवल और पीएचडी की पढ़ाई के लिए किया जाता है। इन फेलोशिप में पहले 30 सीटें ही थीं, जिसे बढ़कर 60 कर दी गईं थी। लेकिन 2014 से यह संख्या बढ़ाकर 100 कर दी गई है।
महाराष्ट्र का है दबदबा
अधिकारियों ने बताया कि एनओएस छात्र के बेहतर भविष्य के लिए स्कॉलरशिप देता है। स्कॉलरशिप पर महाराष्ट्र का दबदबा है। यही वजह है कि वहां के छात्रों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल रहा है। उन्होंने बताया कि स्कॉलरशिप में महाराष्ट्र के छात्रों के आगे होने का कारण यहां इसके प्रति लोगों की जागरूकता है। यहां की सरकार भी इसी तरह की योजना चलाती है।
कई दलित छात्र स्कॉलरशिप से विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने जाते हैं और वहां से आने के बाद वापस दलित समाज के उत्थान में जुट गए हैं। यही नहीं ये लोग विदेशी शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप के प्रति छात्रों को जागरूक भी कर रहे हैं और ये इसमें दिलचस्पी दिखानेवाले छात्रों को सही राह भी दिखाते हैं।
Published on:
04 Jul 2018 09:50 am

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