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महात्मा गांधी की धर्मपत्नी कस्तूरबा की द सीक्रेट डॉयरी ऑफ कस्तूरबा किताब अब हिन्दी में

  कस्तूरबा गांधी पर आधारित किताब 'द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा' अब हिंदी संस्करण भी मौजूद है।

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The Secret Diary of Kasturba

The Secret Diary of Kasturba

नई दिल्ली। महात्मा गांधी को पूरी दुनिया जानती है, लेकिन गांधी के महात्मा बनने के पीछे जिस महान शख्सियत का हाथ है वो हैं उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी, जिसे गांधी 'बा' कहकर बुलाते थे। कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी के साथ एक लंबा अरसा गुजारा। महात्मा गांधी के जीवन के लगभग सभी राज उनकी आत्मकथा 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में दर्ज है लेकिन बा के जीवन से से जुड़ी एक ऐसी ऐसिहासिक किताब मौजूद है उनके जीवन के कई राज खोलती है। वर्ष 2016 में अंग्रेजी भाषा में 'द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा' प्रकाशित हुई थी जिसका अब हिंदी संस्करण भी मौजूद है।

गांधी और बा के बातचीत है दर्ज
नीलिमा डालमिया आधार ने महात्मा गांधी और बा के बीच हुए पत्राचार, उनके सहयोगियों से बातचीत और मौजूद दस्तावेजों के आधार पर 'द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा' लिखा था। वेस्टलैंड द्वारा प्रकाशित यह डायरी बहुत कम समय में बेहद लोकप्रिय साबित हुई। जिसके बाद अब न सिर्फ हिंदी बल्कि तमिल, मलयालम, तेलुगू, बंगाली, मराठी आदि जैसे अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने जा रही है।


कई भाषाओं में जल्द ही
वेस्टलांड के सीईओ गौतम पद्मनाभन के मुताबिक 'द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा' के कई संस्करण पर काम जारी है और जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा, जबकि हिंदी भाषा में अनुवादित डायरी लॉन्च की जा चुकी है।

गांधी-बा के संबंधों का जिक्र
कस्तूरबा की डायरी में एक महिला के रुप में बा का चित्रण भी देखने को मिलता है। उनके दांपत्य जीवन, बिना शर्त प्यार, संभोग और परमानंद के अलावा जीवन के अंतिम दौर का जिक्र है।


खुलेंगे कई राज
'द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा' में महात्मा गांधी के जीवन के ऐसे दस्तावेज दर्ज हैं, जो उनकी आत्मकथा में भी नहीं। बा ने एक पत्नी के रुप में महात्मा गांधी को जिस तरह देखा, उनके अनुभव इस डायरी में दर्ज है। इसके अलावा विवाह के बाद महात्मा गांधी और उनके संबंध, छिटपुट मुद्दों पर पति के साथ मनमुटाव और पढ़ी लिखी न होने के बावजूद चीजों पर अपनी राय रखना कस्तूरबा गांधी की महानता है।

'बा के कारण महान बने गांधी'
डायरी में एक घटना का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि मध्यप्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर महात्मा गांधी के स्वागत के लिए विशाल जनसमूह एकत्र होता है, इसी दौरान भीड़ में से कोई शख्स कस्तूरबा की जय का नारा भी लगाता है। इस समय गांधी के बड़े पुत्र हरिलाल निकट आकर मां कस्तूरबा को एक संतरा देते हुए पिता जी से कहते हैं कि बा के कारण ही आप महान बने हैं।