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छलका शहीद औरंगजेब के पिता का दर्द, 72 घंटे में कातिल नहीं मारे गए तो हथियार उठाने की धमकी

शहीद औरंगजेब के पिता खुद भी भारतीय सेना से में सेवाएं दे चुके हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों द्वारा अपने बेटे की कायरतापूर्वक हत्या कर दिए जाने के बाद वह खुद दहशतगर्दों से लोहा लेने के लिए तैयार हैं।
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श्रीनगर। 44वीं राष्ट्रीय राइफल्स के शहीद जवान औरंगजेब की पिता ने सरकार से अपील की है कि वह 72 घंटे में औरंगजेब के हत्यारों को मार गिराए वरना वह खुद अपने बेटे की शहादत का बदला लेंगे। बता दें कि राष्ट्रीय राइफल्स के जवान औरंगजेब की आतंकियों ने गुरुव्वर को हत्या कर दी थी। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में उनका शव बरामद हुआ था। उन्हें ईद की छुट्टी पर घर लौटते वक्त आतंकियों ने अगवा कर लिया था। देर रात उनका शव अपहरण स्थल से आठ किलोमीटर दूर पुलवामा के गुसू गांव में बरामद हुआ। जवान के सिर और पैर पर कई गोलियों मारी गई थी। आतंकियों ने बर्बरता दिखाते हुए उनके चेहरे को भी क्षत-विक्षत कर दिया था ।

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फौजी रह चुके हैं शहीद के पिता

शहीद औरंगजेब के पिता खुद भी भारतीय सेना से में सेवाएं दे चुके हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों द्वारा अपने बेटे की कायरतापूर्वक हत्या कर दिए जाने के बाद वह खुद दहशतगर्दों से लोहा लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को अल्टिमेटम देते हुए अनुरोध किया है कि वह आतंकियों को मारकर बेटे की शहादत का बदला ले वरना उन्हें खुद हथियार उठाना पड़ेगा । पीएम मोदी से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि मैं सरकार से औरंगजेब के हत्यारे आतंकियों को मार गिराने की अपील क्रहौं। मैं मोदी सरकार को 72 घंटे का वक्त देता हूं। अगर मेरे बेटे के कातिलों को 72 घंटे के अंदर नहीं मारा गया तो मैं खुद बदला लूंगा।

आतंकी समीर एनकाउंटर के हीरो थे औरंगजेब

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 30 अप्रैल,2018 को हिजबुल आतंकी समीर टाइगर को मौत के घाट उतारने वाली मेजर रोहित शुक्ला की टीम में औरंगजेब शामिल थे। मेजर रोहित ने इस एनकाउंटर के बाद औरंगजेब को हीरो बताया था। समीर टाइगर ने 2016 हिजबुल ज्वाइन किया था। उसे हिजबुल अपने पोस्टर ब्वॉय के तौर पर पेश करता था। उसकी मौत से हिजबुल बौखला उठा था। समीर ने आतंकी वसीम के जनाने में भी शामिल होकर मीडिया की सुर्खियों में आने के लिए फायरिंग की थी।

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अगवा करने के 12 घंटे बाद मिला शव

औरंगजेब गुरुवार को ईद की छुट्टी मनाने पूंछ स्थित अपने घर जा रहे थे। वो शादी मार्ग स्थित अपने कैंप से एक अन्य जवान के साथ निकले थे। सड़क पर उन्होंने एक प्राइवेट गाड़ी को हाथ देरकर रूकने का इशारा किया और शोपियां तक छोड़ने की बात कही। करीब 10 बजे गाड़ी पुलवामा जिले के कलमपोरा के पास पहुंची। यहां सड़क पर पहले से करीब 5 आतंकी हथियारों के साथ रास्ता रोककर खड़े थे। यहां से वो औरंगजेब को अगवा कर अपने साथ ले गए।