
नई दिल्ली। हमारा देश अपने आप में बेहद अनोखा है। यहां की अनोखी बातें हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। आज भी हम आपको एक ऐसी ही अनोखे किस्से से रूबरू करवाएंगे। क्या आपको पता है कि भारत में भी एक छोटा सा अफ्रीका है? आप यहीं सोच रहे होंगे कि अफ्रीका तो एक अलग महाद्वीप है तो वो भारत में कैसे आ सकता है और छोटे शब्द का प्रयोग भी क्यों किया गया है? तो आपके इन सभी सवालों का जवाब हम आपको दे रहे हैं।
आज हम एक ऐसे जनजाति के बारे में बताएंगे जो कि गुजरात में बसा हुआ है और इसे गुजरात का अफ्रीका के नाम से भी जाना जाता है। इस जनजाति को सिद्दी के नाम से लोग जानते हंै। ये आदिवासी जनजाति गुजरात के गिर जंगल में बसा हुआ है। इस गांव को जंबूर कहते हंै। ये आदिवासी मूल रूप से अफ्रीका से हैं। ये जनजाति अफ्रीका के बनतु समुदाय से जुड़े हैं। इतिहासकारों का मानना है कि भारत में ये करीब 750 साल पहले आए थे। इन्हें पुर्तगालियों ने गुलाम बनाकर भारत में लाया था।
दूसरी ओर कुछ लोगों का ये भी कहना है कि जूनागढ़ के तत्कालीन नवाब एक बार अफ्रीका गए थे और उन्होंने वहां जाकर एक अफ्रीकन महिला को निकाह करके भारत लाए थे। उस महिला ने अपने साथ करीब 100 गुलामों को भी भारत लाई थी। इसी से इस समुदाय का धीरे-धीरे विकास हुआ। कुछ इतिहासकारों का तो ये भी मानना है कि ये जनजाति भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी पाई जाती है।
इस जनजाति में कुछ लोग इसाई धर्म को मानते है तो कुछ इस्लाम धर्म को मानने वाले है। बहुत कम संख्यक हिंदू धर्म का भी पालन करते हैं। गुजरात के साथ ये जनजाति कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में भी पाए जाते हैं। भारत में इनकी कुल संख्या करीब 50 हजार है। इन पर अफ्रीकन सभ्यता की छाप आज भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। ये लोग शादी के प्रति काफी सख्त रवैया अपनाते है। ये केवल अपने समुदाय में ही शादी करते है जिससे इनकी जनसंख्या ज्यादा नहीं बढ़ी। टूरिस्ट गिर में आकर शेरो को देखने के साथ नई इनके पारंपरिक नृत्य का भी आनंद लेते हैं।
Published on:
28 Dec 2017 10:45 am
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