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क्या है NRC और इसका इतिहास? 10 बड़ी बातों से समझिए नागरिकता विवाद का पूरा मसला

असम देश का एकमात्र राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था है। यह देश में लागू नागरिकता कानून से थोड़ी अलग है। 10 अहम बिंदुओं से समझिए एनआरसी और इसका इतिहास क्या है?

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क्या है NRC और इसका इतिहास? 10 बड़ी बातों से समझिए नागरिकता विवाद का पूरा मसला

नई दिल्ली। देश में एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। इसके चलते असम में रह रहे करीब 40 लाख लोगों पर देश से निकाले जाने का खतरा मंडरा गया है, हालांकि केंद्र सरकार ने अभी अपील करने की व्यवस्था रखी है। फिलहाल असम देश का एकमात्र राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था है। यह देश में लागू नागरिकता कानून से थोड़ी अलग है। अब इसे दिल्ली में भी लागू करने की मांग उठी है। 10 अहम बिंदुओं से समझिए एनआरसी और इसका इतिहास क्या है?

एनआरसी पर 10 बड़ी बातें...

1. 1971 में पाकिस्तान से आजाद होकर बांग्लादेश अलग देश बना था। तभी से कई लोग अवैध तरीकों से भारत में आकर बसने लगे।
2. 80 के दशक में अखिल असम छात्र संघ और असम गण परिषद के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया।
3. 1985 तत्कालीन राजीव गांधी सरकार और आंदोलनकारियों के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत केंद्र ने आश्वासन दिया था कि अवैध बांग्लादेशियों को बाहर किया जाएगा।
4. 15 अगस्त 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड की घोषणा की थी।
5. 1985 से लागू असम समझौते के अनुसार 24 मार्च 1971 की मध्य रात्रि तक असम में प्रवेश करने वाले लोगों और उनकी पीढ़ियों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। लेकिन यह समझौता लागू नहीं हो पाया था।
6. 2013 में असम के कई संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
7. 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और निगरानी में एनआरसी पर ड्राफ्टिंग का काम शुरू हुआ।
8. 2018 में जुलाई महीने में एनआरसी पर फाइनल ड्राफ्ट पेश किया गया।
9. मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी इसे लागू करने के लिए जोर लगा रही है। असम विधानसभा चुनाव 2016 के लिए प्रचार के दौरान भी भाजपा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और 60 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
10. अभी इस मुद्दे का विरोध करने वालों में तृणमूल कांग्रेस सबसे मुखर है। वहीं विपक्ष के अधिकांश दल इस मसले पर तृणमूल के समर्थन में दिख रहे हैं।