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पाकिस्तान पहुंचकर सिद्धू को याद आए अपने आदर्श, बोले-अटल भी दोनों देशों के बीच चाहते थे अमन

पाकिस्तान पहुंचने के बाद सिद्धू को याद आए अपने आदर्श, बोले अटल जी भी भारत-पाकिस्तान के बीच अमन चाहते थे। उन्हीं की वजह से मैं आज राजनीति में हूं।

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पाकिस्तान पहुंचकर सिद्धू को याद आए अपने आदर्श, बोले-अटल भी दोनों देशों के बीच चाहते थे अमन

नई दिल्ली। जब देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के शोक में डूबा था तब एक शख्स पड़ोसी मुल्क के जश्न में शामिल होने पाकिस्तान पहुंचा। जी हां बात हो रही पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की। सिद्धू का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि पाकिस्तान पहुंचने के बाद उनको अटल बिहारी वाजपेयी की याद आई है। सिद्धू पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपना राजनीतिक आदर्श कहते हैं लेकिन उनके अंतिम संस्‍कार में न जाकर वह पूर्व क्रिकेटर व अपने मित्र इमरान खान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के समारोह में भाग लेने गए हैं।

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बहरहाल पाकिस्तान पहुंचते ही नवजोत सिंह सिद्धू को पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की याद जरूर आ गई। उन्होंने कहा कि अटल जी भारत-पाकिस्‍तान के बीच अमन चाहते थे। वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जिंदगी यूं ही चलती रहती है। मैं यहां अमन का पैगाम लाया हूं। सिद्धू बोले, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जाने का बहुत अफसोस है। वाजपेयी भी भारत और पाकिस्तान के बीच अमन चाहते थे। इसीलिए वह बस लेकर लाहौर आए थे। वह कहा करते थे कि जब पड़ोस में आग लगी हो तो उसका ताप, मुझ तक भी आता है।

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लाहौर जाते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने वाघा बार्डर पर पाकिस्तानी मीडिया से खुलकर बात की और खुद को अमन का दूत बताया। उन्होंने कहा कि आज अटल बिहारी वाजपेयी हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन जिंदगी यूं ही चलती रहती है। उन्होंने अमन की जो बात शुरू की थी, मैं उसे आगे बढ़ाने आया हूं। सिद्धू ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत भी पाकिस्तान से जाकर ही की थी जब वाजपेयी साहब के साथ बस में लाहौर आया था। अटल जी ने अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा और मुझे सांसद बना दिया।