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रसगुल्ले पर आए फैसले के बाद CM नवीन पटनायक ने दिया बड़ा बयान, बदल सकता है फैसला

नवीन पटनायक सरकार ने पश्चिम बंगाल के दावे को झुठलाते हुए कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज प्रमाण हैं कि रसगुल्ला सबसे पहले ओडिशा में बनाया गया था।

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भुवनेश्वर। रसगुल्ला का जियोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई) टैग पश्चिम बंगाल के नाम हो गया है। लेकिन ओडिशा सरकार के प्रवक्ता सूर्यनारायण पात्रा का कहना है कि जंग अभी हारी नहीं है। दावा फिर पेश किया जाएगा। उधर भाजपा प्रवक्ता सज्जन शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की ढिलाई से रसगुल्ला का जीआई टैग पश्चिम बंगाल को मिला।

रसगुल्ला को लेकर इस जंग की पहल ओडिशा ने तब शुरू की, जब पश्चिम बंगाल ने यह दावा किया कि नाम लेतेही मुंह में मिठास घोलने वाला रसगुल्ला सबसे पहले पश्चिम बंगाल में बना था। तब ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने दावे को झुठलाते हुए कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज प्रमाण हैं कि रसगुल्ला सबसे पहले ओडिशा में बनाया गया था। इसे जगन्नाथ संस्कृति से जोड़ा गया। पर ओडिशा सरकार वांछित दस्तावेज
रजिस्ट्रार के समक्ष रखने में नाकाम रही।

जीआई रजिस्ट्रार कार्यालय चेन्नई के सीनियर परीक्षक प्रशांत कुमार का कहना है कि ओडिशा के पास प्रामाणिक दस्तावेज दाखिल करने का अभी भी वक्त है। यदि ओडिशा में इसमें कामयाब होता है तो फैसला बदला भी जा सकता है। ओडिशा में रसगुल्ला बनाने वालों ने सरकार के रवैये पर विरोध करते हुए कहा कि सरकार की ढिलायी के कारण रसगुल्ला पर ओडिशा का दावा हल्का पड़ गया। सही समय पर दस्तावेज सौंपे जाते तो निश्चित जीआई टैग ओडिशा का होता।

बंगाल के मंत्री ने दिया था ये बयान

पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के खाद्य प्रसंस्करण मंत्री अब्दुर्रज़्ज़ाक मोल्लाह ने कहा था कि वे ओडिशा को रसगुल्ला ईजाद करने का क्रेडिट लेने नहीं देंगे। इसलिए वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाना चाहते थे। पश्चिम बंगाल के मंत्री ने कहा था कि सरकार भी ऐतिहासिक तथ्यों का ही आधार ले रही है। उनका मानना है कि रसगुल्ले का ईजाद पहली बार बंगाल में हुआ। क्योंकि, बंगाल के विख्यात मिठाई निर्माता नबीन चंद्र दास ने 1868 में पहले-पहल रसगुल्ला बनाया था।

कब मामला सुर्खियों में आया

वहीं यह मामला तब सुर्खियों में आया जब साल 2015 में ओडिशा के विज्ञान एवं तकनीक मंत्री प्रदीप कुमार पाणिग्रही ने मीडिया के सामने दावा किया कि रसगुल्ला ओडिशा राज्य में तकरीबन 600 साल पहले से मौजूद है। उन्होंने इसका आधार भी बताते हुए इसे भगवाना जगन्नाथ के प्रसाद ‘खीर मोहन’ से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रसगुल्ला पहली बार ओडिशा में ही बना था। इसके लिए सरकार ने कुछ समिति बनाई है ताकि इस मामले की रिपोर्ट बनाएगी। इस बयान के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच में रसगुल्ले की मिठास कड़वाहट में बदल गई। यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि ओडिशा सरकार ने साल 2015 में ही भुवनेश्वर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया था। वहीं रसगुल्ले को लेकर सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर अभियान भी चलाया गया।