
नई दिल्ली: खतरनाक ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल को ले कर इन दिनों टीनएजर में उत्सुकता और बढ़ रही है। कई स्टूडेंट्स कह रहे हैं कि खबरों में इसके बारे में जान कर उनकी जिज्ञासा इस गेम को ले कर बढ़ी है। 50 दिन तक चलने वाला ब्लू व्हेल जानलेवा गेम काफी चर्चा में है।
ये गेम बेहद खतरनाक तरीके से टीनेजर की जान तक ले लेता है। इस गेम में 50 टास्क 50 दिन तक करने होते हैं। इन टास्क के दौरान खिलाड़ी अपने हाथों पर नुकीली चीजों से हर दिन एक पॉइंट बनाते है। गेम के आखिरी दिन तक हांथो पर ब्लू व्हेल का निशान बन जाता है। आखिरी दिन खेल कारनामों का वीडियो बनाकर इंस्ट्रक्टर को भेजने के साथ ही खिलाड़ी को सुसाइड करना होता है।
दुनियाभर में इस चैलेंज की वजह से लगभग 150 मौतें हो चुकी है। भारत में भी कई टीनेजर इसके चलते अपनी जान गंवा चुके है।और तो और इस गेम को सर्च करने के मामले में भारत दुनिया भर में नंबर वन पर पहुँच चूका है।
कैसे हुई शुरुआत ?
इस खेल की शुरुआत 2013 में रूस से हुई थी। सोशल नेटवर्किंग के एक ग्रुप F57 जिसे डेथ ग्रुप कहा जाता था, इसके वजह से पहली मौत 2015 में हुई।
रूस की एक यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट फिलिप बुदेकिन ने यह खेल बनाया है। उसके मुताबिक़ उनलोगों को ख़ुदकुशी के लिए उकसाया जा सकता है जिनकी कोई वैल्यू नहीं थी। बुदेकिन को टीनेजर्स को ख़ुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। फिर उसे 11 मई 2017 को आरोपी करार देते हुए 3 साल की सजा सुना दी गई।
क्या है ब्लू व्हेल का मतलब ?
ब्लू व्हेल का संबंध व्हेल्स के सुसाइड से है। पानी में रहने वाले स्तनधारी जिव बिच पर चले जाते है, वहां उनकी डिहाइड्रेशन या हाई-टाइड की वजह से मौत हो जाती है।
भारत में हुए हादसे
भारत में ब्लू व्हेल चैलेंज की वजह से पहली मौत 30 जुलाई को मुंबई में हुई थी। एक 14 साल के बच्चे ने एक इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। इसके बाद इंदौर में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले लड़के जिसे, 10 अगस्त को ख़ुदकुशी करने से ठीक पहले बचा लिया गया। बताया जाता है कि उसने अपनी स्कूल डायरी में पहले के 50 स्टेज के बारे में लिख रखा था। 22 अगस्त को जमशेदपुर में 10वीं कक्षा के एक छात्र ने इस गेम से प्रभावित होकर झील में कूदकर जान दे दी। हालहि में मदुरै के मनार में बीकॉम के 19 वर्षीय छात्र विग्नेश ने इस गेम से प्रभावित होकर ख़ुदकुशी कर ली।
टीनेज ऑनलाइन गेम के प्रति आकर्षित क्यों हो रहे है ?
मनोविश्लेषकों का मानना है कि बच्चों को स्मार्ट फोन के तरफ रुझान बहुत तेजी से बढ़ रहा है। वे स्मार्ट फोन के आदि हो गए है, जिसके कारण वे अकेला रहना पसंद करते हैं। वीडियो गेम खेलना ज्यादा पसंद है, नये नये तरह के ऑनलाइन गेम सर्च करते रहते है। उन्हें गेम में अच्छा स्कोर बनाने का , टारगेट पूरा करने का जुनून होता है। इस जूनून के पीछे जिंदगी हार जाएंगे लेकिन गेम नहीं हारेंगे।
इस स्मार्ट फोन के लत ने उन्हें परंपरागत खिलौने से दूर कर दिया है, किताबों से दूर कर दिया है। पहले वे किताब पढ़ते थे अच्छे व्यक्ति को रोल मॉडल मानते थे। अब स्मार्ट फोन के वजह से वास्तविकता को छोड़ काल्पनिक चीज़ो को रोल मॉडल मानने लग गए हैं। जिसके वजह से वे काल्पनिक दुनिया में खोए रहते है, वही काल्पनिक चीजें उनके दिमाग पर हावी हो जाती है, नतीज़तन वे सुसाइड करने तक तैयार हो जाते है।
खतरनाक ब्लू व्हेल गेम भारत में अपना पैर तेजी से पसार रहा है, इसको लेकर केंद्र सरकार भी ठोस कदम उठा रही है। अलग-अलग राज्य सरकारें भी अपने अपने स्तर पर इससे निपटने की रणनीति तैयार कर रही है।
कानून का रवैया
ऑनलाइन ब्लू व्हेल गेम को बैन करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने फेसबुक, गूगल, याहू जैसे सोशल साइट्स को नोटिस जारी की है। 19 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में इन सोशल साइट्स को यह बताना होगा कि इस गेम को रोकने के लिए उन्होंने क्या ठोस कदम उठाए है? हालांकि केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट के तहत 15 अगस्त को ही फेसबुक, गूगल और याहू को नोटिस भेज चुकी है।
Published on:
02 Sept 2017 09:03 pm
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