ट्विटर के बाद अब फेसबुक को संसदीय समिति का कड़ा संदेश, वैक्सीन लीजिए और जवाब देने के लिए सामने आइए

सूचना प्रौद्योगिकी की संसदीय स्थाई कमेटी ने सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के वर्चुअल मीटिंग के आग्रह को ठुकरा दिया है। कहा है कि फेसबुक प्रतिनिधियों को पैनल के सामने शारीरिक रूप से उपस्थित होना होगा।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के बाद अब फेसबुक सुर्खियों में छाया हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी की संसदीय स्थाई कमेटी ने सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के वर्चुअल मीटिंग के आग्रह को ठुकरा दिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना एवं प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थाई समिति ने फेसबुक को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि कंपनी की नीतियां क्या कहती हैं, फेसबुक प्रतिनिधियों को पैनल के सामने शारीरिक रूप से उपस्थित होना होगा।


फेसबुक का बैठक में व्यक्तिगत रूप में पेश होने से इनकार
दरअसल, फेसबुक ने महामारी कोरोना वायरस का हवाला देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदी की स्थाई कमेटी में व्यक्तिगत रूप से बैठक में पेश होने के लिए इनकार कर दिया, जिसकी वजह से फेसबुक के अधिकारियों ने वर्चुअली मीटिंग में आने का अनुरोध किया है। यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब एक दिन पहले ही समिति ने ट्विटर के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी और उन्हें याद दिलाया था कि माइक्राब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को देश के कानूनों का पालन करना होगा।

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संसदीय कमेटी ने अपनाया सख्त रुख
फेसबुक ने संसदीय समिति को सूचित किया था कि वे ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा ले सकते हैं, जिसे समिति ने खारिज कर दिया था। फेसबुक के इस जवाब के बाद संसदीय कमेटी ने भी अब सख्त रुख अपनाया है। कमेटी के सभी सदस्यों को स्पष्ट करते हुए बताया है कि कोई भी बैठक ऑनलाइन यानी वर्चुअली नहीं की जा सकती है। फेसबुक के अधिकारियों को व्यक्तिगथ रूप से मौजूद रहना होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक थरूर ने अब इस पर जोर दिया है संसदीय नियम ऑनलाइन बैठकों पर रोक लगाते हैं। हालांकि, अभी तक बैठक की तारीख पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। समिति ने कहा है कि वे कंपनी के सदस्यों को टीका लगाने के लिए पर्याप्त समय देंगे, लेकिन मुलाकात सामने मौजूद होकर ही की जाएगी।

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गूगल, यूट्यूब से भी होगी मीटिंग
आपको बता दे कि पैनल ने एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ट्विटर के अधिकारियों से सोशल मीडिया के लिए नए नियमों को पूरी तरह से लागू नहीं करने, अन्य मुद्दों के अलावा 90 मिनट से अधिक समय तक पूछताछ की। यह अब इस तरह की इन-पर्सन मीटिंग के लिए गूगल, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया की बड़ी कंपनियों को भी बुलाएगा।

Shaitan Prajapat
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