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जासूसी कांड: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पेगासस मामला, सॉफ्टवेयर खरीद पर रोक और SIT जांच की मांग

locationनई दिल्लीPublished: Jul 22, 2021 03:19:43 pm

Submitted by:

Shaitan Prajapat

पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए कथित तौर पर भारत में विपक्षी नेताओं और पत्रकारों की जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

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नई दिल्ली। पेगासस सॉफ्टवेयर (Pegasus case) के जरिए कथित तौर पर भारत में विपक्षी नेताओं और पत्रकारों की जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है। वरिष्ठ वकील मनोहर लाल शर्मा ने उच्चतम न्यायाल में एक याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और अन्य की इजराइली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित रूप से जासूसी कराए जाने की खबरों की न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच कराई जाए।

लोकतंत्र, न्यायपालिका, देश की सुरक्षा पर हमला
वरिष्ठ वकील मनोहर लाल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि पेगासस कांड गहरी चिंता का विषय है। यह भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और देश की सुरक्षा पर गंभीर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक स्तर और बिना किसी जवाबदेही के निगरानी करना नैतिक रूप से गलत है। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाना चाहिए। याचिका पर आगामी दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।

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50 हजार से ज्यादा फोन नंबर को बनाया निशाना
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि ऐसा बताया जा रहा है कि एनएसओ ग्रुप कंपनी के ग्राहकों ने 2016 के बाद से करीब 50,000 से ज्यादा फोन नंबर को निशाना बनाया है। इसमें कहा गया है, पेगासस केवल निगरानी उपकरण नहीं है। यह एक साइबर-हथियार है जिसे भारतीय सरकारी तंत्र के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरकार खारिज कर चुकी है जासूसी आरोप
पेगासस जासूसी मामला सामने आने के बाद से विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले की जांच संयुक्‍त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग कर रही है। वहीं सरकार इस जासूसी के मामले को संसद में भी खारिज कर चुकी है।

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केंद्रीय मंत्री, पत्रकार सहित जज के नंबर हैक
एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजरायल के जासूसी साफ्टवेयर के जरिए भारत के दो केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक जज सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के मोबाइल नंबर हो सकता है कि हैक किए गए हों।

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