Birsa Munda Jayanti: भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने किया नमन

prashant jha

Publish: Nov, 15 2017 05:03:14 PM (IST) | Updated: Nov, 15 2017 06:08:30 PM (IST)

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Birsa Munda Jayanti: भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने किया नमन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिरसा चौक पर बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया।

नई दिल्ली: बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत कांग्रेस उपाध्य राहुल गांधी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि “मैं भगवान बिरसा मुंडा को उनकी जयंती पर नमन करता हूं। उनका अदम्‍य साहस प्रेरणा का स्रोत है।’’उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरित होकर हम अपने उन आदिवासी समुदायों को सशक्‍त करने के लिए काम कर रहे हैं जो भारत के गौरव हैं।

राष्ट्रपति ने किया श्रद्धासुमन

वहीं झारखंड स्थापना दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए बुधवार की सुबह रांची पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिरसा चौक पर बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संदेश में कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और जननायक ‘धरती आबा बिरसा मुंडा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। आज के दिन झारखंड की यात्रा करना मेरे लिए खुशी की बात है।

 

रघुवर दास ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर किया नमन

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने ट्वीट में कहा,‘‘आदिवासी समाज में आई नवचेतना के सूत्रधार, आजादी की जंग के महानायक, धर्म और संस्कृति के महारक्षक, साहस और शौर्य के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर शत शत नमन।सीएम ने कोकर स्थित बिरसा मुंडा की समाधि पर माल्यार्पण किया। इसके बाद रघुवर दास ने बिरसा चौक रेलवे ओवर ब्रीज का उद्घाटन किया। वहीं, खूंटी के छात्रों ने बिरसा जयंती के अवसर पर प्रभात फेरी निकली। प्रभात फेरी बिरसा कॉलेज से लेकर पिपराटोली चौक तक निकाली गई। प्रभात फेरी की शुरुआत बिरसा कॉलेज स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई।

 

1900 में हो गए शहीद

राहुल गांधी ने भी बिरसा मुंडा की जयंती पर ट्वीट कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। 15 नवंबर, 1875 को झारखंड के आदिवासी दंपति सुगना और करमी के घर जन्मे बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी।अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दे दिया । जिस कारण वे 9 जून 1900 को शहीद हो गए।

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