
रायबरेली में रेल हादसे के बाद यात्रियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, सरकार का दावा हादसों में आई कमी
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली में बुधवार सुबह बड़ा रेल हादसा ने एक बार यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां न्यू फरक्का एक्सप्रेस की 6 बोगियां पटरी से उतर गईं, इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की खबर है। इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा माना जा रहा है। हालांकि देशभर में पिछले कुछ समय में रेल हादसों में कमी आई है, लेकिन यूपी में सालभर के अंदर कई हादसे हुए हैं। जो प्रशासन के सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मोदी सरकार के बाद देश में लगातार रेल हादसों की झड़ी लग गई थी। कई हादसों ने तो सरकार की कार्यक्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। खास तौर पर सुरेश प्रभु के रेल मंत्री बनने के कार्यकाल ने देश को कई रेल हादसों से रूबरू करवाया। देशभर से विरोध झेल रही सरकार ने आखिरकार सुरेश प्रभु की जगह सितंबर 2017 में पीयूष गोयल को रेल मंत्री का जिम्मा सौंपा गया। गोयल के नेतृत्व में हालांकि देशभर में रेल हादसों में कमी जरूर आई लेकिन अब यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हुई है।
एक नजर मोदी सरकार के दौरान हुए बड़े रेल हादसों पर
- 22 जनवरी 2017: आंध्रप्रदेश के विजयनगरम जिले में हीराखंड एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतरने की वजह से करीब 39 लोग मारे गए।
20 नवंबर 2016: कानपुर के पास पुखरायां में एक बड़ा रेल हादसा हुआ जिसमें कम से कम 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
पटना-इंदौर एक्सप्रेस के 14 कोच पटरी से उतर गए थे।
20 मार्च, 2015: देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी, इस हादसे में 34 लोग मारे गए थे।
4 मई, 2014 : दिवा सावंतवादी पैसेंजर ट्रेन नागोठाने और रोहा स्टेशन के बीच पटरी से उतर गई थी, इसमें 20 लोगों की जान गई थी और 100 अन्य घायल हुए थे।
एक साल के अंदर यूपी में हुए रेल हादसे
- नवंबर, 2017 में भी यूपी के चित्रकूट के पास मानिकपुर में वास्को डि गामा एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में ट्रेन के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए थे, जबकि 3 लोगों की मौत हुई थी।
- सितंबर, 2017 महीने में यूपी के सोनभद्र जिले में एक और रेल हादसा हुआ था, शक्तिपुंज एक्सप्रेस के 7 डिब्बे पटरी से उतर गए। ट्रेन हावड़ा से जबलपुर जा रही थी।
- अगस्त, 2017 में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन मुजफ्फरनगर के खतौली रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गई थी। ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतरकर अगल-बगल के घरों और एक स्कूल में घुस गए। इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी।
- खतौली रेल हादसे के होने के 5 दिन के अंदर कानपुर और इटावा के बीच औरैया जिले में एक और हादसा हुआ था। दुर्घटना की वजह से ट्रेन के इंजन सहित 10 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।
- यूपी के महोबा में 30 मार्च, 2017 को महाकौशल एक्सप्रेस पटरी से उतरी थी, 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पिछले कुछ समय में हुए इन बड़े हादसों के अलावा कई घटनाएं ऐसी भी थीं, जहां पर पटरियों के टूटने की खबर थी. हालांकि, कोई हादसा नहीं हुआ था।
सरकार का दावा एक साल में कम हुए हादसे
हाल में सरकार की ओर से रिपोर्ट के जरिये ये दावा किया गया है कि पिछले साल की तुलना में इस साल काफी कम हादसे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 1 सितंबर 2017 से 31 अगस्त 2018 के बीच कुल 75 रेल हादसे हुए हैं, जबकि 1 सितंबर 2016 से 31 सितंबर 2017 के बीच रेल हादसों की संख्या 80 थी। बड़े रेल हादसों में मरने वालों की संख्या में छह गुना की कमी दर्ज की गई है। घायलों की संख्या में नौ गुना कमी आई है। हालांकि इन दिनों ट्रेनों की रफ्तार निर्माण कार्य के कारण काफी कम हो गई है।
दो साल में हुई रेल यात्रियों की मौत
1 सितंबर 2016 से 31 अगस्त 2017 के बीच करीब 249 रेल यात्रियों की मौत हुई थी और 513 लोग घायल हुए जबकि १ सितंबर 2017 से 30 सितंबर 2018 के बीच हादसों में मरने वालों की संख्या घट कर 40 हो गई और घायलों की संख्या घट कर 57 रह गई।
Published on:
10 Oct 2018 10:02 am
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